गुलाब होठ
गुलाब होठ ओंखों का जाम, हां दे दो न मुझे
बाहों का हार बदन की ताप, हां दे दो न मुझे
गुलाब होठ आंखों का जाम, हां दे दो न मुझे
ये बारिशें और सर्द हवाएं कुछ कह रही है
फैली बाहें तेरी राह आ कबसे देख रही है
कुछ ईशारे कर रही है रात्, हां दे दो न मुझे
गुलाब होठ आंखों का जाम, हां दे दो न मुझे
लुटाऊं प्यार ही प्यार आज वक्त थम जाय
तू मुझमे में मैं तुझमें, इस हद से गुजर जाएं
सुखी है जमीन पर एक बरसात, हां दे दो न मुझे
गुलाब होठ आंखों का जाम, हां दे दो न मुझे
बेनी सागर