**रखो विश्वास खुद पर, गैरों पर नहीं,
उन्हें चाहिए हमारी नाकामयाबी,
हमें चाहिए अपनी आज़ादी।
इसलिए रुकना नहीं,
पीछे मुड़कर देखना नहीं,
हर कदम आगे बढ़ाते जाना।
विश्वास करना खुद पर इतना,
कि कोई तुम्हारा विश्वास तोड़ न पाए।
कठिन परिस्थितियाँ आएँ चाहे कितनी,
तुम उनसे कभी घबराना नहीं,
हर चुनौती का डटकर सामना करना।
हौसला रखना इतना
कि नाकामयाबी तुम्हें रोक न पाए,
हर उपलब्धि तुम्हारे कदम चूमे,
हर सपना तुम्हारा सच बन जाए।
जिस मंज़िल का सपना देखा है,
वह सपना केवल सपना न रहे,
तुम्हारा आज, तुम्हारा वर्तमान बन जाए।
दुनिया पर विश्वास करने से पहले
खुद पर विश्वास करना सीखो,
क्योंकि जब विश्वास खुद पर होता है,
तो सपने केवल सपने नहीं रहते—
वे तुम्हारी मंज़िल बन जाते हैं।