मैं और मेरे अह्सास
कर्म
कर्म का लेखा जोखा रुकता नहीं है l
कोई भी दान धर्म से भरता नहीं है ll
हर कार्य का पडघा पड़के रहता हैं l
कर्म अपने आप से कहता नहीं है ll
फल की चिंता करना छोड़ ही दो l
ईश्वर का हिसाब दिखता नहीं है ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह