जाने वाले भी जाकर
कहां हमसे दूर जा पाते हैं
वो रहते हैं ताउम्र हमारी यादों में
घर के खिड़की दरवाजों की छापों में
कमरों की हर दीवार और कोनों में
छत, चारपाई और बिछौनों में
रसोई में छनते पकवानों में
सभी खुशियों तीज त्यौहारों में
वो रहते हैं आंखों के गीले कोरों में
बंद दिल के एक सूने कोने में
हमारी कामयाबी और आशीर्वादों में
जाने वाले भी दूर कहां जा पाते हैं
बस वो आंखों से ओझल होते हैं...!!
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati