कहानी — “मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है”
🌙 एपिसोड 61
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हवेली की हवा अचानक भारी हो गई।
जैसे किसी अदृश्य तूफ़ान ने हर दरार को चुपचाप भर दिया हो।
रूहानी खड़ी थी…
लेकिन वह रूहानी नहीं लग रही थी।
उसकी आँखों में पनप रहा अंधेरा ऐसा था जैसे कोई और आत्मा उसके भीतर साँस ले रही हो।
अयान ने उसकी तरफ कदम बढ़ाया—
“रूहानी… सुन सकती हो मुझे?”
लेकिन रूहानी ने हाथ उठाया—
एक तेज़ हवा का झोंका अयान को पीछे धकेल देता है।
अयान दीवार से टकरा जाता है।
शायरी चीख पड़ी—
“रूहानी ये क्या कर रही हो?!”
रूहानी ने उसकी तरफ देखा—
उसकी नज़र इतनी ठंडी थी कि कुछ सेकंड के लिए शायरी का गला सूख गया।
ज़ारा मुस्कुरा रही थी।
“देखा? कहा था न…
तुम्हारी रूह में दरार है…
वही दरार मुझे अंदर आने देगी।”
अयान फिर से खड़ा हुआ।
उसकी आँखों में दर्द था—
और उससे अधिक गुस्सा।
“ज़ारा! तूने उसे अपने कब्ज़े में लिया है!
लेकिन मैं उसे वापस ले जाऊँगा।
तू चाहे जितनी ताक़त रखती हो।”
रूहानी—या शायद अब ज़ारा—
एक धीमी, भयानक मुस्कान देती है।
“अयान…
तुम हमेशा से ही उसके लिए लड़ते आए हो।
पिछले जन्म में भी।
लेकिन तुम…
हर बार हार गए।”
कमरों की दीवारों में अचानक दरारें पड़ने लगती हैं।
हवेली की पुरानी खिड़कियाँ ज़ोर से हिलने लगती हैं।
हर दरवाज़े के पीछे लगातार फुसफुसाहटें गूँजती हैं—
“पाप… पाप… पाप…”
“पिछला जन्म… unfinished…”
“मोहब्बत… मौत…”
अचानक रूहानी ने कदम बढ़ाए—
धीरे-धीरे…
जैसे किसी अदृश्य सुर में बंधी हो।
वह अयान के बिल्कुल सामने जाकर रुकती है।
अयान उसकी आँखों में देखता है—
पर उस नज़र के पीछे वो रूहानी नहीं थी
जिसे वह जानता था।
“रूहानी… याद करो,”
अयान फुसफुसाया,
“तुम मेरी हो।
हर जन्म में मेरी थी।
और इस जन्म में भी मेरी ही रहोगी।”
रूहानी हँस दी—
लेकिन वह हँसी ज़ारा की थी।
“मोहब्बत?
तुम्हारी मोहब्बत ने ही मुझे मारा था।”
अयान ने जबड़ा भींच लिया।
“मैंने तुम्हें नहीं मारा!
भले ही पिछले जन्म में क्या हुआ…
इस जन्म में मैं किसी को तुम्हें छूने भी नहीं दूँगा।”
शायरी ने काँपती आवाज़ में कहा—
“अयान… कुछ करो… वो पूरी तरह उसके कब्ज़े में चली जाएगी…”
ज़ारा अचानक पास आई—
उसका साया रूहानी से होकर निकलने लगा…
जैसे वह पूरी तरह रूहानी के भीतर घुसना चाह रही हो।
अयान ने झट से रूहानी के कंधे थाम लिए।
“रूहानी!! मेरी तरफ देखो!”
लेकिन रूहानी ने उसकी ओर चाकू जैसी नज़र डाली।
मुस्कुराई—
और फुसफुसाई—
“अगर तुम मुझे रोकना चाहते हो…
तो पहले मुझे हराओ।”
उसने अयान को धक्का दिया—
ऐसा धक्का जो किसी इंसान का नहीं था।
अयान फिर से गिर पड़ा।
ज़ारा ने फुसफुसाया—
“अब खेल शुरू…
और अंत तक…
तुम्हारा दिल टूटेगा, अयान।”
अचानक कमरे में जलती एक मात्र मोमबत्ती लाल हो गई।
ज़मीन पर एक घेरा बना—
और रूहानी उसके अंदर खड़ी हो गई।
उसकी आवाज़ गूँजी—
“जिन्हें प्यार कहते हो…
वही तुम्हें नष्ट करेगा।”
हवा में ज़ोरदार धमाका हुआ—
कमरा एक पल में अंधेरे में डूब गया।
जब रोशनी लौटी—
रूहानी वहाँ नहीं थी।
केवल उसके गिरते हुए कंगन की हल्की आवाज़ बची थी।
अयान ने कंगन उठाया…
और उसकी आँखों में आँसू थे।
“रूहानी…”
उसने टूटी आवाज़ में कहा,
“मैं तुम्हें ढूँढकर लाऊँगा।
चाहे इस जन्म में…
या पिछले के अंधेरों में उतरकर।”
शायरी डर से बोली—
“वो कहाँ गई?”
अयान ने कंगन कस कर पकड़ा—
और उसकी आँखों में अब मोहब्बत नहीं…
तूफ़ान था।
“वो उस जगह गई है…
जहाँ से आत्माएँ खेल शुरू करती हैं—
ज़ारा का माया
जाल।”
और आज…
अयान ने फैसला कर लिया था—
वह इस मायाजाल में उतरकर रूहानी को वापस लाएगा।
चाहे इसके लिए उसे अपनी रूह भी क्यों न गिरवी रखनी पड़े।
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