Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 64 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 64

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मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 64

❤️ मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है – एपिसोड 64 





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रात गहराती जा रही थी।

बाहर हवा का सुर भी शांत पड़ चुका था—

लेकिन आरव और अनन्या के दिलों में तूफ़ान और बढ़ चुका था।


अनन्या खिड़की के पास खड़ी थी।

अंधेरे में उसका चेहरा आधा छिपा था और आधा चाँदनी में डूबा हुआ।

आरव कमरे में आया, दरवाज़ा बंद किया और बिना कुछ कहे उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया।


उसके बिल्कुल करीब।


इतना करीब… कि अनन्या की साँसें तेज़ होने लगीं।



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💫 1. उसकी खामोशी, उसका इकरार


आरव:

"काफी देर से भाग रही हो मुझसे…

किस बात का डर है तुम्हें?"


अनन्या पलटी, पर उसकी आँखों में वही समुद्र जैसा सन्नाटा था।


अनन्या:

"डर… आपसे नहीं…

उस एहसास से है जो आप मेरे अंदर जगा देते हैं।"


आरव उसके और करीब आ गया।


उसने अनन्या की ठंडी उंगलियों को धीरे से अपनी उंगलियों में लिया…

हल्का-सा दबाया…


आरव:

"तो फिर भागना बंद करो।

क्योंकि मैं भी अब खुद को तुमसे दूर नहीं रख सकता।"


अनन्या का दिल एक पल के लिए रुक-सा गया।

उसकी साँसें सीने में अटक गईं।



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💫 2. दिल की बातें पहली बार


खामोशी कमरे के बीचों-बीच खड़ी थी,

दो दिलों की धड़कनें मानो एक-दूसरे की भाषा समझ रही थीं।


अनन्या ने धीमी आवाज़ में कहा—


अनन्या:

"आपको पता है आरव…

जब मैं आपसे दूर होती हूँ, तब भी आपकी मौजूदगी मुझे घेर लेती है।

जैसे… आप मेरी रूह में छिपे हों।"


आरव हँसा नहीं।

हैरान भी नहीं हुआ।

बल्कि उसकी आँखों में वही आग चमकी जो हमेशा अनन्या को असहज कर देती थी।


आरव:

"तुम्हें पता है अनन्या…

तुम्हें पहली बार देखा था… तब ही दिल ने कह दिया था—

ये लड़की मेरी ज़िन्दगी बदल देगी।"


अनन्या ने झटके से उसकी तरफ देखा—


"मैंने क्या बदला?"


आरव ने उसके चेहरे को हथेलियों में लिया और बहुत धीमे स्वर में कहा—


आरव:

"सब कुछ।

मेरे डर, मेरी सख़्ती, मेरा अकेलापन…

तुमने सब पिघला दिया।

तुम्हारे सामने मैं वो बन जाता हूँ जो शायद मैं खुद भी नहीं जानता था।"


अनन्या की आँखें नम हो गईं।



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💫 3. एक कदम… जो बहुत आगे ले गया


आरव ने एक पल ठहरकर कहा—


"मेरे पास सवाल है तुमसे।"


अनन्या चौंकी—

"कैसा सवाल?"


आरव उसकी ओर झुका… उसकी आवाज़ बेहद धीमी थी—


"क्या तुम… मुझ पर भरोसा करती हो?"


अनन्या कुछ सेकंड उसे देखती रही।


उसकी आँखों में न कोई डर था,

न कोई झूठ…


सिर्फ सच्चाई।


और उसी सच्चाई ने उसका जवाब तैयार कर दिया।


अनन्या:

"हाँ…

अपेक्षा से ज्यादा भरोसा करती हूँ।"


यह सुनते ही आरव के चेहरे पर एक हल्की पर गहरी मुस्कान आई।

जैसे किसी ने उसके अंदर बुझी आग को फिर जगा दिया हो।



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💫 4. पहली बार… उसका हाथ थामा यूँ


आरव ने धीरे-धीरे अनन्या को अपनी ओर खींचा।

अनन्या के पैरों ने खुद-ब-खुद पल भर रुकना बंद कर दिया।


उनके बीच अब बस कुछ इंच की दूरी थी।


आरव ने उसके गाल से गिरती एक बूंद को अंगूठे से पकड़ लिया।


"रो मत…

तुम्हारी आँखों में आँसू मुझे पसंद नहीं।"


अनन्या ने पहली बार आरव की तरफ उसी गहराई से देखा—


"तो फिर मुझे डराना बंद कीजिए।

मैं भावनाओं से भागती नहीं,

बस… वो ज़्यादा गहराई से महसूस करती हूँ।"


आरव ने अनन्या की कमर पर हाथ रखा—

एक सुरक्षादायक, एक दावा कर लेने वाला स्पर्श।


आरव:

"और मैं चाहता हूँ…

तुम मुझे उसी गहराई से महसूस करो।"


अनन्या की साँसें अटक गईं।

पूरा कमरा जैसे दिल की धड़कनों के ताल पर थम सा गया।



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💫 5. रात और भी गहरी हुई


बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी।

खिड़की पर गिरती बूंदों की आवाज़ कमरे की खामोशी को और भिगो रही थी।


अनन्या ने धीमे से कहा—


"आरव… क्या आप सच में बदल गए हैं?

या… ये भी किसी प्लान का हिस्सा है?"


आरव ने उसके माथे को हल्का-सा छुआ।


"तुम्हें लगता है मैं तुम्हारी आँखों में देखते हुए झूठ बोल सकता हूँ?"


अनन्या ने सर झुका लिया।


"नहीं…"


आरव ने उसके ठुड्डी को पकड़कर धीरे से ऊपर उठाया—


आरव:

"तो फिर सुनो…

मैं बदल चुका हूँ।

क्योंकि तुम आ गई हो।

और जब दिल किसी को सच में पा ले…

तो हर प्लान, हर बदला, हर दीवार गिर जाती है।"


अनन्या की आँखों में ठहरा डर धीरे-धीरे कोमलता में बदल रहा था।



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💫 6. एक पल… जो हमेशा के लिए दर्ज हो गया


सन्नाटा अचानक भारी हो गया।

बारिश की बूंदें तेज़ होने लगीं।


अनन्या ने खुद को संभालते हुए आखिरी सवाल पूछा—


"और अगर मैं… आपको छोड़ दूँ?"


आरव ने बिना पलक झपकाए कहा—


“तुम मुझे छोड़ ही नहीं पाओगी, अनन्या।”


अनन्या का दिल तेज़ी से धड़क उठा।


"क्यों?"


आरव उसके कान के बहुत करीब झुका—


“क्योंकि मेरे इश्क़ में शामिल जो रुमानियत है…

वो तुम्हें हर बार मेरी तरफ खींच लाएगी।”


अनन्या ने उसकी आँखों में देखा—

वहाँ एक पागलपन था,

एक दावे की तीव्रता,

और एक ऐसी मोहब्बत… जिसे नकार पाना असंभव था।


उसने पहली बार…

आरव का हाथ कसकर पकड़ लिया।


आरव मुस्कुराया—

एक ऐसी मुस्कान जो प्रेम और जुनून दोनों को साथ लेकर चलती थी।



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💥 एपिसोड 64 का एंडिंग हुक (धमाकेदार ट्विस्ट)


उसी समय…

दरवाज़े पर ज़ोरदार धमाका हुआ—


ठक-ठक-ठक!!!


आरव ने तुरंत अनन्या को पीछे किया।

उसकी आँखें तेज़ हो गईं—

मानो एक सेकंड में वो प्यार करने वाले से खतरनाक शख्स बन गया हो।


आरव बोला—


“ये कौन हो सकता है…

जो आधी रात को यहाँ तक पहुँच गया?”


अनन्या घबरा

ई—

"कहीं… वो लोग तो नहीं?"


आरव ने उसकी तरफ देखा—


“अगर वो हैं…

तो आज रात कोई तूफ़ान आने वाला है।”


दरवाज़ा फिर जोरदार तरीके से हिला—


ठक-ठक-ठक!!!

“दरवाज़ा खोलो, आरव!”


आवाज़… किसी ऐसी की थी

जिसकी उम्मीद दोनों ने सबसे कम की थी।



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