Ishq ke saye mein - 11 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | इश्क के साये में - एपिसोड 11

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इश्क के साये में - एपिसोड 11

एपिसोड – 11
जब नाम वापस आने लगते हैं
दरवाज़ा बंद होने के बाद
वर्कशॉप में एक अजीब-सी खामोशी भर गई थी।
ऐसी खामोशी
जो आवाज़ों की कमी से नहीं,
यादों के बोझ से पैदा होती है।
आरव वहीं खड़ा रहा।
लंबे समय तक।
उसे नहीं पता था
कि जो लड़की अभी-अभी गई है,
वह कौन थी।
लेकिन इतना ज़रूर जानता था
कि उसके जाने से
कुछ अधूरा रह गया है।
उसने टूटी पेंटिंग के पास जाकर
फर्श पर बिखरे रंगों को देखा।
लाल।
नीला।
काला।
काला रंग सबसे ज़्यादा फैला हुआ था—
जैसे कोई साया
अब भी ज़मीन से चिपका हो।
आरव ने ब्रश उठाया।
बिना सोचे।
उसका हाथ खुद-ब-खुद चलने लगा।
कैनवस पर
एक चेहरा उभरने लगा।
अधूरा।
लेकिन जाना-पहचाना।
जैसे ही उसने आँखें बनाईं—
उसके सिर में तेज़ झटका लगा।
दृश्य बदल गया।
अंधेरा।
चारों तरफ़ दीवारें नहीं थीं।
बस अंतहीन खालीपन।
और उस खालीपन के बीच
वह लड़की खड़ी थी।
सफेद कपड़ों में।
आँखों में डर।
“आरव…”
उसने पुकारा।
आरव ने उसकी तरफ़ बढ़ना चाहा—
लेकिन पैर जड़ हो गए।
पीछे से
एक जानी-पहचानी हँसी गूँजी।
वही ज़हरीली हँसी।
साया।
“नाम याद आ रहे हैं?”
उसकी आवाज़ चारों ओर फैल गई।
“यह तो होना ही था।”
आरव ने गुस्से से कहा,
“तू ख़त्म हो चुका है।”
साया हँसा।
“कोई साया कभी ख़त्म नहीं होता, आरव।
बस कमज़ोर पड़ता है।”
लड़की ने डरते हुए पूछा,
“यह कौन है?”
आरव कुछ कह पाता,
उससे पहले—
साया उसके और लड़की के बीच आ गया।
“मैं वही हूँ
जिसने तुम्हें रंगों में क़ैद किया,”
साया बोला।
“और वही
जो तुम्हारी आज़ादी की क़ीमत देख रहा है।”
अंधेरा हिलने लगा।
“अब तुम आज़ाद हो,”
साया ने लड़की से कहा।
“लेकिन आज़ादी की भी एक कीमत होती है।”
“कौन-सी?”
लड़की ने पूछा।
साया ने मुस्कुराकर
आरव की तरफ़ इशारा किया।
“उसका दिल।”
आरव हड़बड़ाकर पीछे हटा।
“यह झूठ है!”
वह चिल्लाया।
साया की आवाज़ और भारी हो गई।
“तुमने तीसरा रास्ता चुना था।
अब हर रास्ते की एक परछाईं होती है।”
अचानक
लड़की के चेहरे पर दर्द उभर आया।
उसने सिर पकड़ लिया।
“कुछ…
कुछ याद आ रहा है,”
वह बोली।
“एक नाम…”
“एक नाम जो…
बहुत अपना है।”
आरव की धड़कन तेज़ हो गई।
“कोशिश मत करो,”
साया फुसफुसाया।
“नाम याद आएगा
तो सब टूट जाएगा।”
लड़की ने आँखें बंद कीं।
“नहीं,”
उसने धीमे से कहा।
“अब नहीं रुकूँगी।”
जैसे ही उसने यह कहा—
अंधेरा चटकने लगा।
दरारें पड़ गईं।
और एक तेज़ रोशनी में—
आरव की आँखें खुल गईं।
वह वर्कशॉप में था।
कैनवस सामने पड़ा था।
उस पर
लड़की का चेहरा पूरा बन चुका था।
और नीचे
एक नाम लिखा था—
“अनाया।”
आरव ने काँपते हाथों से
उस नाम को छुआ।
दिल ने जोर से धड़कना शुरू कर दिया।
“अनाया…”
उसने बुदबुदाया।
नाम लेते ही
सीने में दर्द उठा।
लेकिन इस बार
दर्द के साथ
गर्मी भी थी।
जैसे कुछ लौट रहा हो।
उसी समय—
अनाया सड़क पर चल रही थी।
शहर उसके लिए नया था।
लोग अनजान।
लेकिन दिल बेचैन।
उसके कदम अचानक रुक गए।
सिर में तेज़ दर्द हुआ।
“अनाया…”
किसी ने उसका नाम पुकारा—
या शायद
उसने खुद सुना।
वह हाँफने लगी।
“यह मेरा नाम है…”
उसने खुद से कहा।
यादें
टुकड़ों में आने लगीं।
एक कमरा।
एक पेंटिंग।
एक आदमी—
जिसकी आँखों में डर नहीं था।
“आरव…”
नाम होंठों से फिसल गया।
उसके कदम अपने आप
पीछे मुड़ गए।
उधर
वर्कशॉप में
हवा फिर से भारी हो रही थी।
दीवार पर
साया उभर आया।
कमज़ोर।
दरारों से भरा हुआ।
“नाम याद आ गया,”
साया बोला।
“यह तुम्हारी गलती है, आरव।”
आरव ने ब्रश कसकर पकड़ा।
“तू अब मुझे डरा नहीं सकता।”
साया हँसा।
“मैं डर नहीं हूँ।
मैं क़ीमत हूँ।”
“जब वह वापस आएगी,”
साया फुसफुसाया,
“तुम्हारी यादें लौटेंगी।
और उसके साथ—
दर्द भी।”
आरव ने गहरी साँस ली।
“अगर दर्द ही मोहब्बत की पहचान है,”
उसने कहा,
“तो मैं उसे स्वीकार करता हूँ।”
साया चीख़ उठा।
दीवार की परछाईं टूटने लगी।
“तुम समझते नहीं हो,”
वह गूँजा।
“जब पूरा सच लौटेगा,
तो कोई एक नहीं बचेगा।”
और वह
अंधेरे में घुल गया।
दरवाज़े पर दस्तक हुई।
आरव पलटा।
दरवाज़ा खुला।
अनाया सामने खड़ी थी।
आँखों में आँसू।
होंठ काँपते हुए।
“मुझे याद आने लगा है,”
उसने कहा।
“सब कुछ नहीं…
लेकिन तुम…”
आरव कुछ नहीं बोला।
बस उसकी तरफ़ बढ़ा।
इस बार
जब उन्होंने हाथ पकड़े—
कोई ठंड नहीं थी।
कोई डर नहीं।
सिर्फ़ सच्चाई।
अनाया की आँखों से आँसू बहने लगे।
“अगर सब याद आ गया,”
उसने पूछा,
“तो क्या मैं फिर खो जाऊँगी?”
आरव ने उसका हाथ कसकर पकड़ा।
“नहीं,”
उसने कहा।
“इस बार
हम दोनों तैयार रहेंगे।”
खिड़की के बाहर
शाम ढल रही थी।
लेकिन अंधेरे में
अब सिर्फ़ साया नहीं था।
उम्मीद भी थी।
और कहीं न कहीं—
तीसरे रास्ते पर
इश्क़
अपने पूरे सच के साथ
चल पड़ा था।