बगावत के सुर, एपिसोड 12: छिपी आग, नया संकटआरव के जन्म के छह महीने बाद दर्पंगा रेलवे स्टेशन चमक रहा था। नई ट्रेनें, चमचमाते प्लेटफॉर्म, यात्री खुशहाल। पृथ्वी राठौर अब सीनियर मैनेजर, सनाया पार्ट-टाइम सोशल वर्कर। विक्रम सिक्योरिटी इन-चार्ज, रमेश उनका दाहिना हाथ। रुद्र जेल से बाहर, काउंसलिंग के बाद स्टेशन पर जूनियर स्टाफ। "भाई साहब, मैंने गलतियाँ सुधार लीं," रुद्र ने पृथ्वी से कहा। पृथ्वी ने कंधा थपथपाया, "परिवार एक है। भूल गए सब।"आरव अब नन्हा शरारती, सनाया की गोद में हँसता। एक शाम घर पर फैमिली डिनर। विक्रम ने तोasts किया, "नई पीढ़ी, नई शुरुआत!" लेकिन रात को फोन बजा। पृथ्वी का। अज्ञात नंबर: "राठौर साहब, रुद्र को छोड़ दिया? असली खेल अभी बाकी। भानु प्रताप का साम्राज्य वापस ले लूँगा।" आवाज़ मोटी, धमकी भरी। पृथ्वी चौंका, "कौन?" लाइन कट गई।पुरानी दुश्मनी की वापसीसुबह स्टेशन पर मीटिंग। पृथ्वी ने सबको बताया। रुद्र सफेद पड़ गया, "ये... मेरी मौसी का पुराना साथी होगा। पापा का पुराना पार्टनर, कालिया ठाकुर। जेल से बाहर आया। मैंने बचपन में सुना था—उसने माँ को मारा था।" विक्रम गुस्से से लाल, "कालिया? मुंबई अंडरवर्ल्ड का किंग। रुद्र, तूने क्यों नहीं बताया?" सनाया बोली, "आरव को खतरा मत होने दो।" रमेश ने साइबर टीम बुलाई। ट्रेसिंग से पता चला—कालिया का गैंग स्टेशन के आसपास। प्लान: स्टेशन को नेस्तनाबूद करना, फिर कंट्रोल लेना।दोपहर को हादसा। स्टेशन के सिग्नल सिस्टम फिर फेल। एक मालगाड़ी पटरी से उतरते-उतरते बची। यात्रियों में अफरा-तफरी। पृथ्वी ने इमरजेंसी ब्रेक लगवाया। जांच में वायरस—कालिया का सिग्नेचर। उसी शाम सनाया बाजार से लौट रही, आरव को गोद में। अचानक काली SUV रुकी। दो गुंडे उतरे, "राठौर की बीवी? कालिया भैया का पैगाम—स्टेशन छोड़ो!" एक ने चाकू निकाला। सनाया चीखी, आरव रोया। तभी रुद्र पहुँचा—ट्रैकिंग ऐप से। "पीछे हटो!" रुद्र ने गुंडे पर झपट्टा मारा, लाठी से पीटा। दूसरा भागा। सनाया काँप रही, "रुद्र... तूने बचाया।" रुद्र बोला, "दीदी, मैं बदल गया। परिवार की रक्षा करूँगा।"कालिया का जालरात को पृथ्वी का घर। सब इकट्ठे। विक्रम ने कहा, "कालिया की हवेली—दर्पंगा के जंगल में। कल रेड मारेंगे।" रमेश ने पुलिस को इन्फॉर्म किया। लेकिन रुद्र को शक, "ट्रैप हो सकता है। कालिया चालाक है।" पृथ्वी ने प्लान बनाया: विक्रम और रुद्र अंदर, रमेश बाहर बैकअप। सनाया घर पर आरव के साथ।भोर को जंगल। पुरानी हवेली सुनसान। दरवाजा तोड़ा। अंदर अंधेरा। अचानक लाइट जली—कालिया हँसा। "वेलकम, राठौर!" कमरे में जाल बिछा। गुंडे घेर लिया। कालिया बोला, "भानु प्रताप मेरा भाई था। रुद्र मेरा भतीजा। तूने सब छीना!" गोली चली। झड़प मची। विक्रम घायल, रुद्र ने कालिया को पकड़ा। "चाचा, रुको! बदला से कुछ न मिलेगा।" कालिया हँसा, "बेटा, ये तो शुरुआत।" तभी रमेश पुलिस के साथ। कालिया गिरफ्तार। लेकिन उसके फोन से मैसेज मिला: "गेम खत्म नहीं। नई पीढ़ी का इंतजार।"आरव का रहस्यमहीनों बाद स्टेशन पर बड़ा उद्घाटन—नई इलेक्ट्रिक ट्रेन। पृथ्वी स्पीच दे रहा, "बगावत के सुर अब शांति के।" सनाया स्टेज पर आरव को गोद में। ताली बजी। लेकिन रात को घर पर अजीब घटना। आरव अचानक चीखा, आँखें लाल। सनाया घबरा गई। डॉक्टर ने चेक किया—सब नॉर्मल। लेकिन रुद्र ने फुसफुसाया, "दीदी, भानु प्रताप के खून में श्राप था। काला जादू। क्या आरव में...?" विक्रम ने डाँटा, "बकवास!" पृथ्वी चुप। एक पुरानी डायरी मिली भानु की—'मेरा खून अमर। नई पीढ़ी में जागेगा।'अगली सुबह स्टेशन पर सायरन बजा। सिग्नल फिर फेल। स्क्रीन पर मैसेज: "आरव मेरा है। कालिया सिर्फ प्यादा था। असली मालिक जागा।" पृथ्वी का फोन बजा—एक बच्चे की हँसी। "पापा, मैं आ रहा हूँ।" सनाया रो पड़ी। नई छाया लंबी हो गई। क्या आरव में भानु का भूत? बगावत के सुर फिर गूँजने लगे...