बगावत के सुर, एपिसोड 14:
नया शत्रु, टूटती एकजुटआरव की पहली हँसी ने घर भर दिया। श्राप टूटा, स्टेशन पटरी पर। पृथ्वी राठौर ने फैमिली को इकट्ठा किया। "कालिया जेल में, लेकिन उसका बेटा? सावधान।" सनाया बोली, "पृथ्वी, अब शांति दो। आरव को प्यार चाहिए।" विक्रम ने सिक्योरिटी चेक किया। रुद्र अब फुल-टाइम स्टाफ, "भाई साहब, मैं निगरानी रखूँगा।" रमेश ठीक हो गया, हँसा, "टीम सॉलिड!"नया चेहरादिन बीते। स्टेशन पर नया इंटर्न जॉइन—अर्जुन सिंह, 25 साल का स्मार्ट लड़का। मुंबई से, साइबर एक्सपर्ट। पृथ्वी ने इंटरव्यू लिया। "परिवार?" अर्जुन मुस्कुराया, "माँ अकेली। पापा... गुजरे।" काम शानदार। सब प्रभावित। सनाया ने कहा, "अच्छा लड़का लगता।" लेकिन रुद्र को शक। "उसके आईपी ट्रेस—मुंबई अंडरवर्ल्ड।"एक शाम पिकनिक। आरव घास पर खेला। पृथ्वी-सनाया हाथ पकड़े टहले। "हमारी जिंदगी परफेक्ट," पृथ्वी बोला। सनाया लिपट गई, "प्यार हमेशा।" विक्रम ने आरव को उछाला। रुद्र दूर से अर्जुन को फोन पर देखा। "हाँ पापा, प्लान ऑन।" रुद्र चौंका। घर लौटे तो पुष्टि—अर्जुन कालिया ठाकुर का गुप्त बेटा। बचपन से ट्रेनिंग, हैकिंग में माहिर। प्लान: स्टेशन को ब्लैकआउट कर लूट, बदला।साजिश का जालअगले दिन स्टेशन मीटिंग। पृथ्वी ने अर्जुन को प्रमोट किया। रात को अर्जुन का लैपटॉप हैक। मैसेज: "पापा, रुद्र को साइड करो। सनाया को टारगेट।" रुद्र ने पृथ्वी को बताया। "ट्रस्ट मत करो।" पृथ्वी हिचकिचाया, "प्रूफ?" विक्रम ने ट्रैकिंग की। अर्जुन स्टेशन के सिस्टम में घुसा। लेकिन सनाया ने अर्जुन को कॉफी दी, "परिवार जैसा बनो।" अर्जुन का दिल पिघला? नहीं—रात को हमला।सनाया आरव को सोते भेज रही। दरवाजा खटका। अर्जुन: "दीदी, स्टेशन इमरजेंसी।" बाहर ले गया। गाड़ी में ड्रग इंजेक्ट करने को तैयार। तभी रमेश पहुँचा—ट्रैकिंग से। "हरामी!" लाठी भिड़ी। सनाया चीखी। विक्रम दौड़ा। अर्जुन भागा, लेकिन घायल। घर पहुँचकर पृथ्वी ने पूछताछ। अर्जुन टूटा, "पापा ने कहा—राठौर ने सब छीना। लेकिन... दीदी अच्छी।" रुद्र गुस्से में, "बेटा कालिया का क्लोन!"स्टेशन पर ब्लैकआउटअर्जुन ने सरेंडर किया? झूठ। अगली सुबह स्टेशन पर काला बादल। सारे सिग्नल डेड। ट्रेनें रुकीं। यात्री फँसे। पृथ्वी चिल्लाया, "बैकअप ऑन!" लेकिन सर्वर क्रैश। अर्जुन का वायरस। स्क्रीन पर: "स्टेशन मेरा। 10 लाख दो, वरना क्रैश।" पृथ्वी ने पुलिस बुलाई। सनाया अस्पताल में—ड्रग का असर। आरव रोया।रात को रेड। पृथ्वी, विक्रम, रुद्र, रमेश अर्जुन के ठिकाने—पुरानी मिल। अंदर अर्जुन लैपटॉप पर। "आ गए? पापा की डायरी पढ़ी? भानु ने कालिया को धोखा दिया!" गोली चली। झड़प। विक्रम ने अर्जुन को पकड़ा। "भाई, रुको! हम परिवार बना सकते।" अर्जुन रोया, "पापा जेल में मर रहा। बदला...।" लेकिन बाहर कालिया का गैंग। बड़ा फाइट। रमेश ने ग्रेनेड फेंका। मिल जल गई। अर्जुन फँसा। "बचाओ!" रुद्र ने खींचा। पुलिस आई। अर्जुन गिरफ्तार।भावुक टूटन और एकजुटजेल में कालिया से मुलाकात। पृथ्वी गया। "खत्म करो ये चक्र।" कालिया हँसा, "मेरा बेटा सुधरेगा। लेकिन स्टेशन... हमारा हक।" पृथ्वी बोला, "नई पीढ़ी को छोड़ो।" कालिया चुप। घर लौटे। सनाया ठीक। आरव मुस्कुराया। लेकिन विक्रम ने खुलासा: "रुद्र, तू अर्जुन से मिला था गुप्त।?" रुद्र टूटा, "मैं... सुधारना चाहता था। परिवार।" झगड़ा। पृथ्वी ने सब संभाला, "एक रहो।"महीनों बाद स्टेशन पर ग्रैंड ओपनिंग। नई ट्रेन लॉन्च। अर्जुन जेल से चिट्ठी: "सॉरी। काउंसलिंग में।" सनाया ने पढ़ा, "माफ़ी?" पृथ्वी ने चुंबन दिया, "हाँ। बगावत खत्म।" फैमिली डांस। आरव ताली बजाया। लेकिन दूर ट्रेन सीटी—एक नया सुर। क्या पुरानी दुश्मनी का आखिरी अध्याय? रुद्र ने देखा—एक रहस्यमयी आदमी प्लेटफॉर्म पर। "ये कौन?"