नई सुबह, नया संकेत
चेन्नई की जीत के बाद टीम को लगा था कि अब शांति मिलेगी। लेकिन आर्यन की चिट्ठी ने सबको फिर से हिला दिया—"अगला मोर्चा दिल्ली संसद है।"
पृथ्वी ने गंभीर स्वर में कहा, “अब यह आखिरी लड़ाई होगी। संसद पर हमला देश की आत्मा पर हमला होगा।”
सनाया ने चिंतित होकर कहा, “अगर संसद पर हमला हुआ तो पूरा देश हिल जाएगा।”
नीरा ने कंप्यूटर पर डेटा निकाला। “दिल्ली संसद भवन और इंडिया गेट पर गतिविधियाँ बढ़ी हैं। यही अगला निशाना है।”
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दिल्ली का सफर
टीम सुबह फ्लाइट से दिल्ली पहुँची। शहर की भीड़, संसद की सुरक्षा और हलचल ने सबको चौकन्ना कर दिया।
तारा ने कहा, “यहाँ दुश्मन छिपना आसान है। हमें हर कदम सोच-समझकर रखना होगा।”
आर्यन ने बताया, “माया ने संसद में भी अपने लोग बैठाए थे। यही उसका सबसे बड़ा सपना था।”
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संसद का रहस्य
रात को टीम ने संसद भवन की ओर रुख किया। वहाँ सुरक्षा कड़ी थी।
नीरा ने सिस्टम हैक किया। स्क्रीन पर नक्शा उभरा—"संसद भवन" और "इंडिया गेट" पर लाल निशान।
“ये लोग संसद पर हमला करने वाले हैं।”
पृथ्वी ने कहा, “हम इसे रोकेंगे। चाहे कुछ भी हो।”
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नया मास्टरमाइंड
संसद के पास अचानक एक आदमी सामने आया। उसका चेहरा नकाब से ढका था।
वह बोला, “मैं माया का असली वारिस हूँ। मेरा नाम विक्रांत है। संसद मेरा किला है।”
टीम चौंक गई। तारा ने बंदूक तानी। “तू कौन है?”
विक्रांत हँसा। “मैं माया का बेटा हूँ। अब मैं उसका सपना पूरा करूँगा।”
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भावनात्मक झटका
आर्यन ने विक्रांत को देखा और बोला, “तुम मेरे भाई हो!”
विक्रांत ने कहा, “हाँ। लेकिन तुमने हमें धोखा दिया। तुमने दुश्मनों का साथ दिया।”
आर्यन रो पड़ा। “मैं बच्चों को बचाना चाहता हूँ। मैं लड़ाई नहीं चाहता।”
विक्रांत ने गुस्से में कहा, “तुम कमजोर हो। माया का सपना मैं पूरा करूँगा।”
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संसद भवन का खतरा
नीरा ने सिस्टम से पता लगाया कि अगले दिन सुबह संसद भवन पर बम लगाया जाएगा।
पृथ्वी ने कहा, “हमें रात में ही इसे रोकना होगा।”
टीम ने योजना बनाई। तारा और नीरा संसद भवन पर रहेंगी, जबकि पृथ्वी और सनाया इंडिया गेट की ओर जाएँगे।
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रात की भिड़ंत
संसद भवन पर तारा और नीरा ने विक्रांत के गुंडों से मुकाबला किया।
नीरा ने कंप्यूटर हैक कर बम का लोकेशन निकाला।
तारा ने लड़ते हुए कहा, “नीरा, जल्दी करो!”
नीरा ने जवाब दिया, “बस कुछ सेकंड और।”
इसी बीच विक्रांत ने हमला किया। “तुम मुझे नहीं रोक सकते।”
तारा ने बंदूक तानी। “संसद को बचाना होगा।”
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इंडिया गेट में दौड़
पृथ्वी और सनाया इंडिया गेट पहुँचे। वहाँ भीड़ थी।
पृथ्वी ने सिग्नल रूम में घुसकर सिस्टम बंद किया।
सनाया ने यात्रियों को बाहर निकाला। “सब लोग बाहर निकलो!”
बम ट्रैक पर लगा था। पृथ्वी दौड़कर पहुँचा।
नीरा ने रेडियो पर कहा, “कोड 5566 डालो।”
पृथ्वी ने कोड डाला। बम डिफ्यूज हो गया।
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विक्रांत का सामना
संसद भवन पर विक्रांत ने तारा को पकड़ लिया।
“तुम्हें मारकर मैं माया का सपना पूरा करूँगा।”
तभी आर्यन आगे आया। “भाई, रुक जाओ। ये रास्ता गलत है।”
विक्रांत ने गुस्से में कहा, “तू मेरा भाई नहीं। तू गद्दार है।”
पृथ्वी वहाँ पहुँचा। उसने विक्रांत से कहा, “तू बच्चों को हथियार बना रहा है। ये बगावत नहीं, पागलपन है।”
विक्रांत ने बंदूक तानी। लेकिन तारा ने गोली चलाई।
विक्रांत घायल होकर गिर पड़ा।
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आखिरी शब्द
विक्रांत ने मरते हुए कहा, “माया का सपना कभी खत्म नहीं होगा। अगली पीढ़ी उठेगी।”
आर्यन रो पड़ा। “भाई…”
पृथ्वी ने उसे गले लगाया। “अब सब खत्म हो गया।”
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संसद की जीत
सुबह संसद सुरक्षित थी। लोग सामान्य जीवन में लौट आए।
पुलिस ने संसद भवन और इंडिया गेट को सुरक्षित कर दिया।
सनाया ने कहा, “आज हमने हजारों लोगों की जान बचाई।”
पृथ्वी ने मुस्कुराकर कहा, “ये असली जीत है।”
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परिवार का सुकून
शाम को परिवार ने दिल्ली में डिनर किया। बच्चे हँस रहे थे।
सनाया ने कहा, “अब हमें नई शुरुआत करनी होगी।”
पृथ्वी ने उसका हाथ थामा। “हाँ। अब शांति का समय है।”
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नया संकेत
रात को आर्यन ने एक और चिट्ठी दिखाई।
"बगावत की जड़ें सिर्फ संसद में नहीं। अगला मोर्चा पूरे देश में है।"
टीम चौंक गई। तारा ने कहा, “तो लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।”
पृथ्वी ने दृढ़ता से कहा, “हम देश को बचाएँगे। चाहे कितनी भी बगावत क्यों न हो।”
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निष्कर्ष
एपिसोड 29 ने संसद की जंग को दिखाया। विक्रांत का खुलासा, माया का बेटा, और संसद भवन पर खतरा—सबने कहानी को और रोमांचक बना दिया। टीम ने संसद को बचाया, लेकिन आखिरी चिट्ठी ने साफ कर दिया कि बगावत की जड़ें और भी गहरी हैं। अब अगला मोर्चा पूरे देश में है।