रेत मुठ्ठी में भरने से क्या फायदा,
हाँथ में इस तरह, कुछ बचेगा नहीं।
मेरे दिल से जो खेलोगे तुम बार-बार,
अबके टूटा जो दिल ये, जुड़ेगा नहीं।।

Satish Thakur

Hindi Shayri by Satish Thakur : 111864941
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