"सैंडविच नहीं, एहसास"
दो ब्रेड के बीच लगे जब अमूल बटर,
दिल भी पिघल जाए कुछ ज़्यादा ही अंदर।
भर-भर के जब फ़ेक चीज़ लगे,
हर डाइट, हर वादा खुद ही भागे।
हरी चटनी बोले— “अब रुकना मना,”
आलू-प्याज़ ने स्वाद का झंडा तना।
टमाटर की नमी, मसालों का ज़ोर,
हर लेयर बोले— “मुझे भी थोड़ा और!”
ग्रिल की आँच पे जब ब्रेड सुनहरी हो जाए,
समझो सैंडविच नहीं… लव स्टोरी बन जाए। 🥪🔥