शीर्षक: मेरी खिड़की का जंगली गुलदस्ता🎀
🌸मेरा जंगली गुलदस्ता🌸
किताबों के बोझ और इम्तिहानों के शोर में,
सुकून की एक छोटी सी तलाश थी,
वो कोई महँगा तोहफा नहीं था हाथ में,
बस रस्ते के किनारे खिले फूलों की आस थी।
न किसी ने सींचा, न किसी ने संवारा,
धूप और धूल को ही अपना बनाया था,
वो जंगली फूल थे साहब,
जिन्होंने बंजर में भी मुस्कुराना सिखाया था।
कांच के उस गिलास में सजाकर उन्हें,
मैंने अपनी खिड़की पर क्या रखा,
मानो शहर की सारी ताज़गी को,
अपनी एक मुट्ठी में भर लिया।
वो चार दिन का साथ, वो कोयल की आवाज़,
मेरी बकेट लिस्ट का एक हसीन पन्ना बन गया,
बड़े-बड़े बागीचों से जो न मिल सका,
वो सुकून मुझे इन जंगली फूलों में मिल गया।
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✨️"खुशी महंगी चीजों में नहीं, उन लम्हों में है जिन्हें हम खुद अपने लिए चुनते हैं।"✨️
न माली की ज़रूरत, न बागीचों की होड़,
राहों के इन फूलों ने, दी हर मुश्किल को मरोड़।
किताबों के शोर में, ये शांत सा एक कोना था,
जंगली फूलों की सादगी में, मुझे बस थोड़ा सा खोना था।
🦋खिड़की पर सुकून🦋
किताबों के शोर में,
वो शांत सा एक कोना था,
जंगली फूलों की सादगी में,
मुझे बस थोड़ा सा खोना था।
न कोई माली, न कोई जतन,
बस कांच का गिलास और मेरा मन।
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💝बेनाम सी खुशियाँ💝
"न बागीचों का शौक, न गुलदस्तों की चाह,
मुझे मिल गया मेरा सुकून, बस चलते-चलते राह।"