Hindi Quote in News by Sonu Kumar

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राइट टू रिकॉल पार्टी और राघव चड्ढा की आम आदमी पार्टी के Right To Recall कानून ड्राफ्ट प्रक्रिया में क्या क्या फर्क है, और इनके द्वारा बताया गया रिकॉल प्रक्रिया कितने दिनों में शुरू होगा?
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(01) Right to Recall Party के कानून में Recall प्रक्रिया: चुनाव के बाद 7 दिन में शुरू होगा।

Raghav Chaddhas के कानून में Recall प्रक्रिया: 1.5 साल में! इन डेढ़ साल में कई कई गलत कानूनों को MLA/MP'S अपनी पार्टी अध्यक्ष के दबाव/लालच के कारण समर्थन कर सकता हैं। इससे जनता का नुकसान होगा!
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(02) कितने लोग रिकॉल की प्रक्रिया की "शुरुआत" कर सकते हैं?

Right to Recall Party का Recall प्रक्रिया में: केवल 1 वोटर से शुरुआत हो सकता है।

आम आदमी पार्टी के - Raghav Chaddhas के Recall प्रक्रिया में: लोकसभा या विधानसभा के 35 से 40% वोटर,से हीं होगा! जिसके अभाव में रिकॉल शुरू हीं नहीं होगा! इससे जनता का नुकसान होगा।
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(03) रिकॉल कैसे करेंगे ?

Right to Recall Party: पंजीकृत (रजिस्टर्ड) मोबाइल से sms, app द्वारा (घर बैठे) या सरकारी ऑफिस में जाकर रिकॉल को स्वीकृति देकर वोट वापसी पासबुक में दर्ज करा सकेंगे।

Raghav Chaddhas Recall : सरकारी ऑफिस में जाकर हस्ताक्षर करना होगा जिसके सैंपल उनके पास न होने पर सरकारी अधिकारी, आपके हस्ताक्षर को नकार सकता है।
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(04) क्या कोई रसीद मिलेगी ?

Right to Recall Party : वोट वापसी पासबुक— जो की हर वोटर को मिलेगी, में वोटर रिकॉल की स्वीकृति दर्ज की जाएगी। यह वोट वापसी पासबुक रसीद के समान होगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : नहीं, जिसके अभाव में आपकी रिकॉल की स्वीकृति को नकारा जा सकता है, जिससे रिकॉल के स्वीकृतियों के नंबर घटेंगे। डुप्लीकेट साइन करके स्वीकृतियों की संख्या बहुत बढ़ाई भी जा सकती है। इससे जनता का नुकसान होगा।
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(05) क्या रिकॉल की स्वीकृतियां तुरंत सार्वजनिक होंगी?

Right to Recall Party : हाँ, सभी स्वीकृतियां वोट वापसी पासबुक में रजिस्टर्ड होंगी। स्वीकृतियां सार्वजनिक होने से उनमें उलट फेर नहीं किया जा सकेगा।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : नहीं, स्वीकृतियां सार्वजनिक नहीं होने से स्वीकृतियों के संख्या में उलट फेर संभव होगा।
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(06) कानून में बदलाव कैसे होगा?

Right to Recall Party: 51% नागरिक इस कानून की कोई भी धारा संसद से निकलवा या जुड़वा सकेंगे।

Raghav Chaddhas Recall : केवल संसद हीं बदलाव कर सकते हैं!! इससे जनता का नुकसान होगा।
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(07) स्वीकृतियों की संख्या कितनी होगी?

Right to Recall Party : MLA/MP को जितने वोट मिले हैं, उससे 1% (कुल वोटरों का) अधिक।

Raghav Chaddhas Recall : कुल वोटरों का 35 से 40%। अगर MP/MLA 25% वोट से जीते हों तो भी 35 से 40% लोगों की स्वीकृतियां चाहिए। रिकॉल बहुत कठिन होगा।
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(08) क्या पिटीशन वेरिफाई करनी होगी?

Right to Recall Party : वोट वापसी पासबुक की प्रक्रिया में कोई (petition) जांच की आवश्यकता नहीं होगी। स्वीकृतियों की संख्या, नाम के साथ हर हफ्ते सार्वजनिक होंगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : सरकारी अधिकारी हस्ताक्षर और संख्या की जांच करेगा जिसमें नागरिकों का समय खराब होगा, भ्रष्टाचार होगा और रिकॉल टाला जाएगा। जनता का नुकसान होगा।
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(09) क्या पिटीशन के बाद MLA/MP निकाले जाएंगे?

Right to Recall Party : Petition की जरूरत नहीं। रिकॉल की प्रक्रिया के बाद MP/MLA निकाले जाएंगे।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : Petition के बाद 51% वोटर वोट करके निकालने के लिए हां कहेंगे, फिर MLA/MP निकाले जाएंगे। तो फिर पिटीशन क्यों चाहिए? क्योंकि जनता का नुकसान करना है!
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(10) रिकॉल का आधार क्या होना चाहिए?

Right to Recall Party : जनता को ठीक लगेगा तो रिकॉल कर लेगी।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : रिकॉल का आधार "सिद्ध" (proven) कदाचार, भ्रष्टाचार, हेराफेरी, गंभीर रूप से काम ना करना होना चाहिए? यह कौन तय करेगा ? कैसे होगा यह राघव जी ने बताया ही नहीं। क्योंकि जनता को मामू बनाना है!
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(11) क्या कोई रिकॉल संभव होगा?

Right to Recall Party : नागरिक कोई भी खर्च, जोखिम, परेशानी के बगैर भ्रष्ट MLA MP की कुर्सी से बदल सकेंगे।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : 18 महीने तक कोई रिकॉल नहीं, फिर 35 से 40% नागरिकों की हस्ताक्षर की हुई पिटीशन की जांच होगी!, फिर 51% वोटर की हामी के बाद के रिकॉल होगा?। यह सब के रहते केवल हस्ताक्षर के नाम पर वसूली, भ्रष्टाचार, जाति, धर्म के नाम पर सर फोड़ना होगा। जनता का बहुत नुकसान होगा।
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(12) जिन देशों में यह रिकॉल है वहां क्या स्थिति है ?

Right to Recall Party: अमेरिका के California राज्य में और बाकी देशों में भी ऐसे पॉजिटिव रिकॉल से वहां अच्छे से चल रहा है। इस प्रक्रिया स्थिरता आती है और भ्रष्टाचार में बहुत कमी आती है।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : Peru, Bolivia, Equador यहां पर हजारों Petition file होते रहते हैं और भयंकर अस्थिरता होती है। इस प्रक्रिया का परिणाम अस्थिरता और हजारों की संख्या में पिटीशन फाइलिंग है। जनता का बहुत नुकसान होता है!
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(13) क्या भारत में पहले से कहीं रिकॉल लागू है?

Right to Recall Party के जैसे ड्राफ्ट वाला Right To Recall कानून: यह प्रक्रिया भारत में कहीं भी लागू नहीं है।

AAP- Raghav Chaddhas Recall : ऐसी ही प्रक्रिया 10 राज्यों में अलग-अलग समय पर केवल सरपंच पर लागू हुई है। 1994 से लेकर 2025 तक, केवल 2 हीं सरपंच, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में रिकॉल हुए हैं।

To be continued....

Hindi News by Sonu Kumar : 112015969
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