महफ़िल सजाएँ रखी है, तेरी याद को बुलाया है,
हर शम्मा बुझा दी हमने, बस दिल को जलाया है।
मेरे लफ़्ज़ों की इन कतारों में तेरा ही तज़किरा है,
मेरी चुप्पी ने भी आज जैसे, तेरा नाम सुनाया है।
जो छुपाया था, वो ख़्वाब मुस्कुराने लगे अब
तेरी आहट ने, महफ़िल का सारा राज़ उठाया है।
हम ने तो सिखाया था दिल को सब्र का हुनर,
पर एक तेरी नज़र ने, सब कुछ भुलाया है।
तू आए न आए मगर, ये रस्म हम निभाएँगे,
महफ़िल सजाएँ रखी है, दिल आज भी सजाया है।