हम लोग कैसी सोच के साथ जी रहे हैं।
हमें खुद ही मालूम नहीं है।
क्या किताबों के पन्नों पे लिखी अच्छी बातें या विचार सही अर्थों में पढ़े-लिखे लोग अपनाते हैं?
सही में पढ़े-लिखे लोग ये बातें अपनाते तो?
क्या होता?
आज़ जो विश्व मे अशांति की परिस्थितियों बनी है, वो बनती ही नहीं।
क्युकी आज दुनिया को अशांति के तहखाने में भेजनेवाले लोगों पढ़े-लिखे लोग ही हैं।
सही में पढ़े-लिखे लोग ही हैं? जो बिना सोचे ही ऐसे कागजों पर अपने हस्ताक्षर कर लेते हैं जो आगे जाकर कितने निर्दोष लोगों की जान की वजह बनते हैं।
और वह लोगों अपने आपको खुद से महान मानते हैं।
वो लोगों विश्वनेता बनकर भी कायरों वाले काम कर जाते हैं।
जब कि एक अनपढ़ आदमी मानवता, जीवदया ओर शांति का सही मतलब समझता है।
तो वह सही अर्थों में पढ़ा-लिखा है।
जो इंसान अपने झूठे अहम को पालने के लिए अपनी ताकत का ग़लत इस्तेमाल करता है उससे उसका गोड, ख़ुदा या ईश्वर कभी भी खुश रहता नहीं है।
जो मानवता को मारकर सिंहासन भी पा लेता है उसका कोई मूल्य रहता नहीं है, वह डोनाल्ड नहीं डोन ही रहता है।
जबकि यदि कोई अपने संस्कारों को अपनी शिक्षा में रखकर मानवता के लिए अपना सिंहासन भी ठुकरा दे वह लाखों दिलों में राज करता है।
वह राघव राम का रुप धरते हैं जो सिंहासन खोकर भी दिलों पर राज करते हैं।।