वो दमकती हुई लौ कहानी हुई
वो चमकदार शोला फसाना हुआ
वो जो उलझा था वैसी हवा से कभी
उस दिए को बुझे तो जमाना हुआ,,
अब तो अमजद जुदाई के उस मोड़ तक
दर्द की दुंद है और कुछ भी नहीं '' जाने मन,,
अब वो दिन लौटने के नहीं
छोड़िए वो किस्सा पुराना हुआ
vijju,,,,,,,