Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

कविता
दर्दनाक यादे

दर्दनाक यादव के साथ
आधी रात में आने वाले खौफनाक सपना
जिसे आंखों मैं आते ही लोग चिल्लाकर उठ जाते हैं



यह यादें उन दिनों की है जब हम
किसी के डर से छुपा करते थे
आंखें बंद कर लिया करते थे

और चाहते थे कि
हम कभी आंखें ही ना खोले
और यह पल बित जाए
या तो सब कुछ खत्म हो जाए

या तो उम्मीद होता कोई आए
और हमें बचा ले

उस राक्षस से जो हमें पीटने के लिए
हमारे पीछे पड़े हैं


और वही दर्द डर के साऐ अब तलक ख्वाबों में है
वह चिल्लाहट से गुजते हुए आवाज
वह सिकोड़ते हुए आंखें
वह डरावनी चेहरा

अभी भी ख्वाबों में आ जाता है
और फिर हमें उन्हीं दिनों में ले जाते हैं
जब हम सबसे दर्दनाक दिनों में थे


और डर घबराहट के मारे
हम पूरे जोर लगाकर वहां से भागते हुए
और खुद को जागते हुए
चिल्ला कर उठ परते हैं


एक बच्चे के ख्वाबों को हमेशा खुशनामा होना चाहिए

और उसी बच्चे की ख्वाब दर्दनाक होते हैं
उम्र बीतते हुए
वह दर्द वो डर कम होने की वजह
और भी बड़ जाते हैं


नहीं पता समय के बाद वह बच्चे वह व्यक्ति कैसे बन जाते हैं
पर सच यह है कि वह भरोसा करना छोड़ देते हैं


उसे अकेलापन खाता नहीं है
वह जिंदगी से थक जाते हैं
फिर भी जीते रहते हैं


वह खुद से बोड़ हो जाते हैं
फिर भी उनके सांसे चलते रहते हैं


उसे उम्मीद नहीं है किसी से
पर जरा सा उम्मीद
उस इत्तेफाक उस कायनात में है
जो हर किसी की लाइफ में एडजस्ट करता है



वह बुरी यादें के साथ कुछ बच्चे जीना सीख लेते हैं
तो कुछ बच्चे उन यादों से भागते रहते हैं
जिंदगी भर


हर रिश्ते से बचते रहते हैं
जिंदगी में आने वाले हर अचीवमेंट से दूर रहते हैं
यह सोचकर के उसे फिर दर्द ना हो


वह घाऊ जो कभी भरा ही नहीं
उसे कोई खोरोज कर बाहर ना निकल दे


वह बच्चा जो सब कुछ छुपा कर रखा है
ऐसा नहीं है
कि वह समय के साथ ताकतवर हो गया है
सच यह है कि वह अंदर से डरा और सहमा हुआ है


इस दुनिया से इस समाज से अपनों से
यादों से ख्वाबों से वह डरा हुआ है


और यह डर उससे हर रोज तिल तिल मार रहा है
ऐसा नहीं है कि
जो हुआ उसमें उस बच्चों की गलती थी


पर सच इस समाज को सुकारता हुआ नहीं बन रहा

वो बच्चे समाज से डर रहे हैं
और समाज सच से



और यह साइकिल जिंदगी भर चलता रहता है
उस समाज और बच्चे की जिंदगी में
कभी ना खत्म होने वाले दर्द
और कभी ना भरने वाले जख्म
और समाज के कभी ना समझने वाले नासमझ के साथ



गजल


भीड़ है फिर भी तनहा है
दर्द में डुवो वे लम्हा लम्हा है

आखिर अकेला कौन है
और कौन साथ किसका है

दर्द है तो आके कहते हो हम है ना
फिर चिंता किस बात का है
सब साथ सभी का है
तो आखिर में अकेला कौन है


आखिर अकेला कौन है

Hindi Poem by AbhiNisha : 112025067
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now