एक वृक्ष के बीज को दफन किया,
उसने अंकुरित होकर जीवन दिया।
हवा, पानी और जमीन को शुद्ध किया,
प्रकृति के नवसर्जन में सामिल हुआ।
वह वृक्ष इतने से नहीं रुका,
अपनी शाखाएं पक्षियों के लिए दे दी।
तुम घोंसला बनाओं ओर अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाओ।
वह इंसानों की तरह ईर्षा भाव कहां रखते हैं?
कोई मुसाफ़िर आराम फरमाते हुए उन्हें देखता है तो उन्हें खुशी महसूस होती है,
क्योंकी किसी के हृदय को छांव से शांति जो मिलती है।
सुख जानें के बाद भी सूखी लकड़ी से किसी गरीब के चूल्हे पर भोजन पकाकर उसको अच्छा खाना मुहैया कराता है।
वृक्ष सही में एक एक अच्छा मित्र हैं।