मुसलसल ग़ज़ल: चश्म-ए-तर और सावन की शब
शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'
१.
बरसती रात है, तन्हाई है, ख़याल-ए-यार है दिल में,
तसव्वुर का वही सावन, वही बौछार है दिल में।
ख़याल-ए-यार:-प्रियतम का विचार / याद
तसव्वुर:-कल्पना
२.
ज़मीं पर बूँद गिरती है तो सीना काँप जाता है,
कि जैसे हिज्र की जलती हुई तलवार है दिल में।
हिज्र:- विरह / जुदाई
३.
सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ को लोग नग़्मा समझते हैं,
मग़र इस अब्र के पीछे कोई बेज़ार है दिल में।
सदा-ए-रिमझिम-ए-बाराँ:-बारिश की रिमझिम आवाज़
अब्र:-बादल
बेज़ार:-दुःखी / उदास
४.
वो एक लम्हा जो गुज़रा था कभी सावन की रातों में,
उसी इक लम्हे की ख़ातिर अभि सदक़ार है दिल में।
सदक़ार:-न्योच्छावर होने वाले जज़्बात
५.
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में जो मौसम गुज़ारे थे,
उन्हीं ज़ुल्फ़ों की महकती हुई सी कार है दिल में।
कार:-असर / यादों का ताना-बाने की हलचल
६.
हवा जो सर्द चलती है तो रूह सिहर-सी जाती है,
कि दस्त-ए-यार का जैसे कोई इक़रार है दिल में।
दस्त-ए-यार:-महबूब का हाथ
७.
कहाँ वो वस्ल की रातें, कहाँ ये हिज्र का आलम,
नसीब-ए-आशिक़-ए-मुज़्तर बहुत लाचार है दिल में।
वस्ल:-मिलन
आशिक़-ए-मुज़्तर:-व्याकुल प्रेमी
८.
क़फ़स-सा बन गया है अभि ये भीगा-भीगा-सा मौसम,
कि पंछी की तरह ज़ख़्मी कोई ग़मख़्वार है दिल में।
क़फ़स:- पिंजरा
ग़मख़्वार:- दुःख बांटने वाला / दर्द से भरा हुआ
९.
नयन मूँदूँ तो बहती है लहू की एक नदी-सी कहीं पर,
ये चश्म-ए-तर नहीं, अश्कों का इक बाज़ार है दिल में।
चश्म-ए-तर:- नम आँखें
१०.
कड़कती है जो बिजली नभ के सीने पर तड़प कर के,
लगा जैसे अभिषेक ही अरमान की झंकार है दिल में।
११.
दुआ को हाथ उठते हैं तो बस यादें ही आती हैं,
तुम्हारी बंदगी का ही तो बस इफ़्तार है दिल में।
इफ़्तार:- यहाँ समापन या पूजा के फल के अर्थ में
१२.
शराब-ए-नाब की सूरत जो लगती थी कभी बूँदें,
वही बूँदें अभिषेक ज़हर का अम्बार है दिल में।
शराब-ए-नाब:- शुद्ध अमृत समान जल
१३.
तुम्हारी याद का मस्कन हुआ है ये बदन मेरा,
कि जिसके हर एक कोने में फ़क़त आज़ार है दिल में।
मस्कन:- निवास / घर
आज़ार:- रोग / दुःख / कष्ट
शायर:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'