मंजिलें पुकारती हैं
अंधेरों की चादर से जो घबराकर रुक जाएगा,
तूफानों के आगे भला वो मुकाम क्या पाएगा?
राहों में कांटे हों हजार, तो कदम रोक मत प्यारे,
इन कांटों पर चलकर ही तू अपना आसमान छू पाएगा।
माना कि तेरी इस राह में, मुश्किलें बहुत बड़ी हैं,
हर मोड़ पर चुनौतियां, दीवार बनके खड़ी हैं।
पर याद रख, जो लहरों से लड़कर आगे बढ़ता है,
वही असली योद्धा इस दुनिया में कहलाता है।
सोये हुए अपने जज्बातों को, फिर से एक बार जगा ले,
अपने अंदर के उस आसमान को, तू आज पहचान ले।
तेरी रग-रग में दौड़ता, एक पक्का इरादा महान है,
फिर डर किस बात का, जब तेरी हिम्मत की अपनी पहचान है।
गिरना और संभलना तो, इस सफर का दस्तूर है,
आज अंधेरा घना है, तो क्या हुआ? सवेरा भी दूर नहीं है।
उठ, चल पड़, और अपनी मेहनत से लिख दे नई कहानी,
तेरी इस जीत की गवाही देगी यह पूरी दुनिया सुहानी!
~Shubhra Dubey