Hindi Quote in Poem by AbhiNisha

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वे गमों के दोनों
कविता गीत


हु। ,

खोई नहीं मैं इस रंग रलियों में
फसा नहीं मैं इश्क की तंग गलियों में

हवा जैसी बेहती ईत्र जैसे महकी
गुलाब जैसे मशहूर थी


फिर भी उम्र कटी तनहा है मैंने
अकेलेपन में खोया रहा
अपनी ही दर्द में सोया रहा

वक्ति ही नहीं निकाल पाया हमने चाहत की



खुद की गमों में मशगुल थी इस तरह की
थी किसकी नजर पाखी
देखा ही नहीं कभी



सोई नहीं मैं महबूब के पल्को तले
जागी भी नहीं मैं किसी के इन आंखों में ख्वाबों को लेकर


धड़कता दिल खुद थम सा गया
मेरे इन आंखों में मेरे लिए ही है दया


खोई नहीं मैं इस रंग रलियों मे
फसा नहीं मैं इश्क की तंग गलियों मे



मेरे इन आंखों में मेरी यादें हैं
चंचल मन खुद को खुद में संभाले
खुशियां आधे हैं


वे गमों के दिनों
वे रास्ते बिन आसरे की
यादें मेरी थके ख्वाबों की



बस सोच है बिना लालसे की
घड़ीया बिती उम्र बिता इश्क के दिनों की
बस रह गई मैं मेरे दर्द के साथ
बिते यादों के लिए
बिना आसरे की खुद को संभालते हुए

मैं यहां मेरे गम मेरे दर्द के साथ
मेरे बेचैन धड़कन अब है शांत





गजल

धड़कन अब भी है सीने में
और वह धड़कता भी है
पहले की तरह वह अब भी अपने ही दर्दों की सोर से भरा हुआ है

Hindi Poem by AbhiNisha : 112032212
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