कविता पार्ट 1
औरत के लिए
शायरी किताबों पर ही अच्छी लगती है
औरत के लिए
मर्द यह करते हैं मर्द वह करते हैं औरत के लिए
फिर औरत क्यों रोती है
रियल लाइफ में देखो
हर कविता बेकार लगती है
औरत के लिए
कोई चांद नहीं कोई शान नहीं
ना सुनहरा जहां
ना कोई सितारा ना खुद का कोई सूरज
बस खाली आसमान
लोग कहते हैं बंजर है
धरती यहां की
जहां औरत रहती है
बस खुद की
तुमने कहा
औरत के लिए मर्द क्या-क्या नहीं करते
पर हर औरत इतनी खुश नसीब नही होती
की कविता से बाहर
उस औरत की जिंदगी कोई मर्द आ कर
उसकी जिंदगी सवार दे
सच यह है कि औरत को मर्द नहीं चाहिए
बस चाहिए एक साथी जो उसके साथ चलते रहे
सच यह है कि
औरत को मर्दों से कुछ नहीं चाहिए
ना धन दौलत ना ना चांद सितारे
ना हीरा मोती
बस औरत को चाहिए उसे समझने वाला एक इंसान
उसे एक ऐसा इंसान चाहिए
जो औरत को कहे
तु औरत नहीं एक इंसान है
और आजादी पर जितना मेरा हक है
उतना ही तुम्हारा भी
औरत इसलिए नहीं खुश होती की
दुनिया की हर कविता
उसे पर लिखी जा रही है
औरत इसलिए रोती है
क्योंकि उस कविता में
औरत पूरी तरह से खुद की नहीं है
कभी कोई कविता औरत को पूरी तरह से शामिल किया ही नहीं है
औरत को कविता से बाहर वह मर्द चाहिए
जो औरत को उसे अपना कर दे
और कहे जी ले
अपनी जिंदगी मैं हूं ना
तेरे साथ