न किसी चेहरे पे अब नज़र जाए,
ज़िंदगी जैसे-तैसे गुज़र जाए।
उसके साथ कहाँ फिर सुकून मिले,
जब कोई दिल से ही उतर जाए।
जो मेरी ग़ज़ल पढ़ ले एक दफ़ा,
आँख मुमकिन है उसकी भर जाए।
हसीन वादियों का भला क्या करे,
जब कोई जीते-जी ही मर जाए।
साँसें थमने लगी हैं तुम्हारे बिन,
तुझ तक कैसे भी ये ख़बर जाए।
मेरी दुनिया उजाड़ने वाली, सुन,
तेरी दुनिया चाहता हूँ सँवर जाए।
✍️ प्रकाश कुमार