मैं बहुत दूर हूँ तेरी निगहबानी से
मुझे निकाल न अपनी कहानी से
तेरे लब हैं ज़रूरी अब लगता है
मेरी प्यास न बुझेगी अब पानी से
मेरी क़दर कैसे करतीं तुम भला
मैं तुमको मिल गया था आसानी से
तुम बिन किस तरह हो गया बर्बाद मैं
लोग देखते हैं मुझको हैरानी से
वो फूल, पर्स, डायरी संभाल रखी है
मुझे प्यार है तेरी हर निशानी से
✍️प्रकाश कुमार