खुद को इतना व्यस्त रखने के बाद शाम को......
जब भी अपने लिए थोड़ा सा वक्त बचाती हूं.....
तो उसमें भी अक्सर यही सोचती हूं...
कि ऐसी कौन सी ख्वाहिशें थी मेरी.... जिसको पाने के लिए मैने खुद को खो दिया.. एक वक्त था....
जब जिन्दगी जीने का शौक था....
अब लगता है, जिन्दगी कट जाएं वहीं बहुत हैं...
- Riddhi Gori