स्त्रियाँ अक्सर अपनी सुविधा के हिसाब से रिश्ते बनाती हैं। उनका आकर्षण बहुत त्वरित और अकारण होता है, जहाँ बुद्धि से अधिक क्षणिक आवेग का नियंत्रण होता है। उनका प्रेम या तो अर्श तक ले जाता है, या क्षण भर में फर्श पर ला पटकता है। जब छोड़ती हैं, तो केवल साथ नहीं छूटता; साथ चला जाता है आपका आत्मविश्वास, आपका स्वाभिमान और आपका करियर। पुरुष का प्रेम क्षणिक नहीं, भविष्य-केंद्रित होता है; वह आज भी उसे जीवनसंगिनी बनाकर घर लाने का स्वप्न संजोता है।