मैं और मेरे अह्सास
बस एक बार
बस एक बार वादा निभाने आ जाओ l
दो पल के लिए दिल सजाने आ जाओ ll
शमों हया के सभी पर्दों को चीरकर l
तन मन में मुकम्मल समाने आ जाओ ll
चारागर बनके लफ्जों की दवा लाना कि l
सोये हुए अरमान जगाने आ जाओ ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह