ग़म का फ़लसफ़ा
ग़म में ग़म को भुलाया हमने,
ग़म को ही ग़म बनाया हमने।
ग़म की महफ़िल में ख़ामोश रहे,
अपने ही दर्द से हम रूबरू रहे।
ग़म को तस्लीम किया, ग़म से गिला न किया,
दिल में तूफ़ान रहा, लबों से बयाँ न किया।
ग़म की तफ़सीर में उम्र गुज़ारी हमने,
हर ख़ुशी में भी ग़म की झलक पाई हमने।
ग़म से भागे तो ग़म ने पुकारा हमें,
ग़म को भुलाया तो ग़म ने सँवारा हमें।
ग़म का फ़लसफ़ा भी अजीब पाया हमने,
ग़म को समझते रहे, ख़ुद को भुलाया हमने।