दिल में एक एहसास लिए बैठे हैं,
हम ख़ामोशियों में आवाज़ लिए बैठे हैं।
भीड़ तो साथ है पर तन्हा हैं हम,
हर महफ़िल में खुद को तलाश लिए बैठे हैं।
वक्त ने तो बहुत कुछ छीना है हमसे,
फिर भी कुछ ख्वाब बाक़ी लिए बैठे हैं।
फ़क़त इतना सुन लो, हम अभी बाक़ी हैं।
-Dharmendra Kumar