फिलिस्तिन इसराइल का.....(दोहे)
फिलिस्तिन इसराइल का, शुरू हुआ था युद्ध।
अमरीका-इरानी तब, कूद पड़े थे क्रुद्ध।।
हिजबुल्ला हूति हमास, आतंकी पर्याय।
धर्मोन्मादी फौज को, देख सभी थर्राय।।
परमाणू बम की कथा, जग में मचा बवाल।
अमरीका बाहें चढ़ा, ठोंके अपनी ताल।।
धर्म लबादा ओढ़कर, मानवता का ह्रास।
मुट्ठी में दुनिया समझ, करते सत्यानाश।।
इजराइल अभिमन्यु बन, बीच फँसा है देश।
दुश्मन की सेना खड़ी, विकट रहा परिवेश।।
समय परिस्थिति ने उसे, बना दिया है शेर।
सीना ताने वह खड़ा, दुश्मन माँगे खैर।।
युद्ध गए हैं अब बदल, ना घोड़ा तलवार।
घर में ही अब बैठकर, करते शत्रु प्रहार।।
ड्रोन मिसाइल दागते, जनता को है क्लेश।
जीना दूभर हो गया, मानव-दुश्मन देश।।
हार्मोस के रूट में, बाधित किए जहाज।
दिल की धड़कन बंद कर, मानव-पंगु-समाज।।
रोक तेल की धार को, ढाया सब पर जुल्म।
संकट की बेला खड़ी, कैसे टूटे इल्म।।
समवर्ती कुछ देश भी, फँसे हुए हैं जाल।
मुस्लिम खाड़ी देश का, बड़ा बुरा है हाल।।
इधर कुआँ खाई उधर, सभी रहे हैं डूब।
बनी धुरंधर फिल्म अब, चली जगत में खूब।।
झगड़े की यह पटकथा, दो देशों के बीच।
आग लगी है तेल में, देश फँसे हैं कीच ।।
विश्व युद्ध का बिगुल सुन, बजा हुआ है आज।
दो ईश्वर सद्बुद्धि अब, रहे शांति का राज ।।
मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'