कैसे कह दूं कि- भुला दिया है तुझको..
कि- तेरी आवाज अब नहीं गूंजती मेरे कानों मे..
कि- हवा का हल्का सा झोंका तेरा एहसास नहीं करता..
कि तेरे साथ गुजारा हुआ पल अब याद नहीं आता..
कि भरी भीड़ में तेरी यादें मुझे तन्हा नहीं कर जाती..
कि रातों को तेरा ख्याल सोने नहीं देता..
ये दिल के रिश्ते बड़े बेरहम होते हैं साहब,
दिल में ही रहते हैं ता उम्र तड़पाने को..!!
- Soni shakya