मेरी एकांत जिंदगी,,,,,
मेरी खुशियां
मेरी खुशियां
मेरे सिरहाने यूहीं बिखरी रहती है
मेरा आई पैड, कुछ पत्रिकाएं, मेरा फोन
मेरा श्रवण यंत्र
ओर मेरा निपट एकांत
सब मिल कर एक सिम्फोंनी क्रिएट करते
कभी कभी तो अल्लसुभह के 3 बजे तक
मुझे सपने नहीं आते
मुझे पता नहीं सपने क्या होते हे,,,,
सपनो का आना तो बंद आंखों में ही होता हे
ओर में अपनी आंखे खुली रखता हु
इस डर से कि कही
आंखे बंद की बंद ही न रह जाए
ग़ालिब कही गूंज रहे होते हे