सुनो ना…
आज मासिक धर्म पर खुलकर
बात करते हैं...
सुनो ना…
आज उस ख़ामोशी को तोड़ते हैं,
जो हर महीने
एक औरत के दर्द को
शर्म के पर्दे में छुपा देती है।
ये कोई गुनाह नहीं,
ना ही कोई कमजोरी है,
ये तो प्रकृति की वो भाषा है
जिससे जीवन जन्म लेता है।
फिर क्यों फुसफुसाहट में
कहा जाता है इसका नाम..?
फिर क्यों निगाहें झुक जाती हैं,
और सवाल पूछना भी
गुनाह समझ लिया जाता है..?
पेट की ऐंठन,
मन की थकान,
और चेहरे पर मुस्कान ओढ़े
दुनिया निभा लेना...
क्या ये कम हिम्मत की बात है..?
सुनो ना…
आज सिखाओ बच्चों को
कि ये “गंदा” नहीं,
बल्कि “ज़रूरी” है।
आज कहो सबको
ये तो औरत होने की
सबसे सच्ची पहचान है।
चलो आज
खुलकर बात करते हैं,
क्योंकि जब बात होगी,
तभी समझ बढ़ेगी,
और जब समझ बढ़ेगी
तभी सम्मान मिलेगा...!!
एक सच्चाई है ये इस लिए सोच बदलो मर्दों ♥️♥️♥️♥️✍️✍️✍️✍️
❤️💯🔥✍️