दीपक के साथ भी एक अजीब दास्तां हुई थी लोगों की
. लोगों ने उसे प्रज्वलित करके खुश कर दिया
क्या पता था बेचारे दीपक को, की वह किस कहानी में फंस गया है
. जिस घी से भरे तालाब को देखकर वह खुश हो रहा था, वह तालाब अब सूख गया है..
लगी जिस्म में आग जब दीपक के तो लोगों को पुकार लगाई होगी
. परंतु नहीं है परछाई भी पास में तेरे अपनों की, यह बात बैबस दीपक को उसकी मौत ने बताई होगी...//