मेरी आरजू को बहारों की तमन्ना थी
हर खुशी उड़ा ले गई हवा
अब क्या रह गई तमन्ना थी
दर्द भी क्या खुब दिया उसमें
हमेशा दिल में दबाकर रखने की तमन्ना थी
आधियों का जोर, है मालुम हमें
इक शमा जलाने की तमन्ना थी
चिराग काफी नहीं घर को
जुगनुओं को घर बुलाने की तमन्ना थी
मैं अपने गम को रोता नहीं मगर
तेरी आंखें नम देखकर
खुद को स्लाने की तमन्ना थी