कविता - स्वतंत्रता दिवस
आजादी का गलत अर्थ निकाल रहे युवा
आजादी के नाम पर उपद्रव मचा रहे युवा
क्या यही सपना देखा था
वीर भगत सिंह ने आजादी का
क्यों पथ भ्रष्ट हो रहे युवा
तोड़-फोड़, आगजनी कर रहे युवा
छोड़ पढ़ाई आंदोलन कर रहे युवा
खो गई नैतिकता व संवेदनाएं
खो गया देशप्रेम कहीं जनता का
अपने ही देश को बेच रहे युवा
सोशल मीडिया के दलदल में फंस
खुद को बर्बाद कर रहे युवा
ये वो विवेकानंद का देश नहीं
ये वो भगतसिंह का देश नहीं
जिसका सपना देखा था
वीर अमर बलिदानों ने
स्वतंत्रता दिवस को आज
बस एक छुट्टी मान रहे युवा
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली