समय का गणित
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आज का समय प्रश्न का ,और जिज्ञासा का समय है। बुद्धिमान लोग समय के हिसाब से निर्णय लेते है और समय का गणित निर्णय लेने की क्षमता का गणित है। वह व्यक्ति जो निष्कर्ष पर पहुंचे वहीं निर्णय ले सकता है।
आज के हमारे विचार,भाव और चिंतन प्रश्न रहित है। जहां प्रश्न नहीं होगा, वहां निर्णय नहीं होगा, और जहाँ निर्णय नहीं होगा वहां प्रगति कहा से होगी?
इसे दूसरे दृष्टि से देखे...
एक विद्यार्थी को लगता है कि वह पढ़ाई में और खेलकूद में दूसरों से कमजोर है। वह इस चीज को सोचता रहता है और उसके दिमाग की बनाई हुई परिस्थितियों में फंस जाता है। इसे हम नकारात्मकता का "लूप" कहेंगे। अब इस लूप से निकलने का सबसे आसान तरीका प्रश्न है। सिर्फ "?" लगाना है , में पढ़ाई में और खेलकूद में कमजोर क्यों हूँ? और उस विद्यार्थी का चिंतन सक्रिय हो जाएगा और फिर प्रश्न के ऊपर प्रश्न करना है , क्या इसे बेहतर बनाने का कोई रास्ता है? किसी भी समस्या या उलझन से त्वरित निकलने का मार्ग प्रश्न है।
अष्टावक्र गीता, भगवद गीता और उपनिषदों की शुरुआत से ले कर विज्ञान की उपलब्धियों का चिंतन भी प्रश्न से ही निकला है।
ज्योतिष के दृष्टिकोण से प्रश्न कुंडली और टैरो जैसी विद्याओं का आविष्कार भी प्रश्न के कारण ही हुआ।
जिसके सारे प्रश्न समाप्त हो गए वह या तो ज्ञानी हो गया, या तो मूढ़। आप के पास कुछ ऐसे प्रश्न हो जो आप के चिंतन को सक्रिय करे, आप को उत्साह से भर दे, उसका उत्तर मिलने पर आप को स्पष्टता और प्रसन्नता हो तो वह प्रश्न ही उपलब्धि और प्रगति का द्वार है। हर एक समस्या को प्रश्न की तरह देखे और उसका उत्तर खोजे।
आप देखेंगे कि इस खेल में आपका अंतर विकसित होगा।