तस्वीरें तो उन लोगों को सँभालनी पड़ती हैं,
जिन्हें भूल जाने का डर हो।
मैं उसे तस्वीरों में नहीं रखता,
वो तो मेरी हर धड़कन में रहती है।
आँखें बंद करूँ तो सामने आ जाती है,
आँखें खोलूँ तो अंदर बैठी मिलती है।
उसे देखने के लिए अब तस्वीर की ज़रूरत नहीं पड़ती,
क्योंकि वो मेरी यादों में नहीं रहती...
वो तो मेरी रूह के पते पर शिफ़्ट हो चुकी है।