‼️ " अंदर दूजा कौन है? " ‼️
सब एक से हैं जहाँ में तो जुदा कौन है?
मिलता नहीं तो कैसे कहूँ ख़ुदा कौन है?
गिरते हैं वो अपनी हरकतों की वजह से,
वरना किसी की नज़रों से कूदा कौन है?
महँगाई की मार पड़ी तब जा के जाना,
सरकार और प्रजा में ख़रबूज़ा कौन है?
दस्तक दे कर देखा मैने दिल के आईने में,
बाहर तो मैं खड़ा हूँ, अंदर दूजा कौन है?
पंख आते ही छोड़ जाते हैं सब घोंसले,
साथ लेकर के 'व्योम' यहाँ उड़ा कौन है?
✍...© विनोद. मो. सोलंकी " व्योम "
जेटको (GEB) अंजार. मु. रापर.