💫 "रास नहीं आती" 💫
हर किसी को यहाँ अच्छाई रास नहीं आती।
उनको तो अपनी ही परछाईं रास नहीं आती।
मर गया हो ज़मीर और दिल में हो स्वार्थ भरा,
उनको कभी भलों की भलाई रास नहीं आती।
जिसको चढ़ा हो सिर पर घमंड अपने ज्ञान का,
उस अज्ञानी को ज्ञान की खराई रास नहीं आती।
छोटी छोटी बातों पर शुरू कर दे जो रोना धोना,
उन्हें तो कभी खुदा की खुदाई रास नहीं आती।
गोबर के कीड़े को कितना भी साफ़ कर लो,
ऐसे कीड़ों को कभी सफ़ाई रास नहीं आती।
ज़ोर-शोर से बोलते हैं झूठ अक्सर वो लोग,
जिन्हें ये ज़माने की सच्चाई रास नहीं आती।
हर दफ़ा मिला मुझे दगा ही दगा मोहब्बत में,
पर क्या करें कि मुझे तन्हाई रास नहीं आती।
वफ़ा की उम्मीद रखें तो रखें किस से 'व्योम',
जिन्हें खुद अपनों की वफ़ाई रास नहीं आती।
✍...© विनोद मो. सोलंकी "व्योम"
जेटको (GEB) अंजार, मु. रापर।