Mere Ishq me Shamil Ruhaniyat he - 59 in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 59

Featured Books
Categories
Share

मेरे इश्क में शामिल रुमानियत है एपिसोड 59

कहानी — “मेरे इश्क़ में शामिल रुमानियत है”
🌙 एपिसोड 59


---

⭐ 1. अयान का खून… और ज़ारा का संदेश

रूहानी को यक़ीन ही नहीं हो रहा था।
अयान की कलाई से बहता खून
जैसे सीधे उसके दिल को चीर रहा था।

“अयान… ये कैसे हुआ?!”
उसने काँपते हुए अयान का हाथ पकड़ लिया।

अयान मुस्कुराया—
वही दर्द छिपाती, तसल्ली देती मुस्कान—

“ज़ारा ने सिर्फ़ चेतावनी भेजी है।
जब रूहें हमला करती हैं,
वो शरीर को नहीं…
टूटे हुए हिस्सों को निशाना बनाती हैं।”

रूहानी की आँखों में आँसू आ गए।
“तो मेरा हिस्सा…
तेरी कमजोरी है?”

अयान ने उसकी ओर देखा।
“हाँ।
और उसी वजह से…
उसे सबसे ज़्यादा खतरा भी है।”

हवेली ओस जैसी ठंडी हो चुकी थी।
दीवारों पर हल्की-हल्की धुंध जमा थी।
कहीं दूर चूड़ियों की खनक
हल्की आवाज़ में गूँज रही थी।

जैसे ज़ारा बस नज़र रख रही हो।
इंतज़ार कर रही हो।
अगला वार चुन रही हो।


---

⭐ 2. शायरी की हालत बिगड़ती है

अचानक कमरे से एक तेज़ चीख़ आई।

“अयाआआअन!!”

रूहानी और अयान दौड़कर अंदर पहुँचे।
शायरी नीले घेरे के भीतर काँप रही थी—
उसके चेहरे का रंग राख जैसा सफेद
और ज़मीन पर लकीरों की तरह
नीले धुएँ के निशान।

शायरी ने हाँफते हुए कहा—
“अयान… वो यहाँ थी…
उसने कहा कि
वो मुझे नहीं मारेगी…
लेकिन मेरे ज़रिए किसी को… बुला लेगी…”

अयान का चेहरा जम गया।
रूहानी ने घबरा कर पूछा—
“किसे बुलाएगी?”

शायरी ने बड़ी मुश्किल से शब्द निकाले—
“तुम…
का…
पिछला…
जन्म।”

रूहानी ठिठक गई।
“क्या?”

अयान ने धीरे से रूहानी का हाथ दबाया।

“ज़ारा खुद को नहीं मार सकती।
इसलिए वो उस रूह को जगाने की कोशिश कर रही है
जो पिछले जन्म में…
उसकी सबसे बड़ी दुश्मन थी।”

रूहानी के कदम लड़खड़ा गए।
कमरा घुमने लगा।

“मतलब…
मैं किसी की दुश्मन थी?”

अयान की आँखें झुक गईं।

“हाँ…
ज़ारा की।”


---

⭐ 3. हवेली के रहस्य का असली खुलासा

अयान ने रूहानी को कमरे से बाहर ले जाकर
हवेली के पुराने दरवाज़े के पास बैठाया।

हवा भारी थी।
जैसे कुछ प्राचीन राज खुलने ही वाला हो।

“रूहानी…”
अयान ने धीमे-धीमे कहा,
“इस हवेली का इतिहास सिर्फ़ बदले और मौत का नहीं है।
यहाँ दो बहनों की कहानी दबाई गई थी।”

रूहानी ने भौंहें चढ़ाईं।

“दो बहनें…?”

“हाँ।”
अयान बोला,
“एक— जो मोहब्बत में पवित्र थी।
और दूसरी— जो मोहब्बत में जुनूनी थी।”

रूहानी की आँखों में अजीब सी चमक उभरी।
“मैं… कौन थी?”

अयान की आवाज़ टूट गई।

“तुम वही हो…
जिससे ज़ारा ने मोहब्बत छीनी थी।”

रूहानी का दिल धड़ककर रुक गया।

“मतलब…
पिछले जन्म में…
हमारा कोई रिश्ता था?”

अयान ने गहरी साँस ली।

“हाँ।
और ज़ारा…
तुमसे उस जन्म का बदला लेने लौटी है।”


---

⭐ 4. ज़ारा का दूसरा वार

उसी पल हवेली में हवा चीखी।
पर्दे ऊपर उठ गए।
झूमर की रोशनी एकदम लाल हो गई।

और सीढ़ियों से
एक लड़की की परछाई नीचे उतरने लगी।

धीरे…
तरह-तरह मुड़ते हुए…
जैसे उसकी हड्डियाँ टूटी हों।

रूहानी ने डर से अयान का बाजू पकड़ा।

“अयान… वो… वो कौन है?”

अयान ने धीमी आवाज़ में कहा—

“वो ज़ारा नहीं है।
वो है…
वो रूह…
जिसे ज़ारा तुम्हारे अंदर जगाना चाहती है।”

परछाई पास आई।
उसका चेहरा अँधेरे में ढंका था।
काले बाल जमीन पर घिसट रहे थे।

और अचानक—
उसने अपना चेहरा उठाया।

रूहानी चीख पड़ी।
अयान के कदम भी रुक गए।

क्योंकि वो चेहरा…
रूहानी जैसा था।

बस…
आँखें काली, खाली…
और उनमें जलता बदला।

परछाई ने क्रोध में कहा—

> “तुमने मेरा सब कुछ छीना था…
अब मैं तुम्हें लौटकर लेने आई हूँ।”



रूहानी ने अविश्वास में फुसफुसाया—
“वो… वो मैं हूँ…
या मेरी रूह?”

अयान ने उत्तर दिया—

“वो…
तुम्हारा अतीत है।
और ज़ारा उसे तुम्हारे खिलाफ खड़ा कर चुकी है।”


---

⭐ 5. रूहानी बनाम रूहानी – पहली भिड़ंत

जैसे ही परछाई आगे बढ़ी,
अयान ने अपनी ताबीज़ उठाई—
लेकिन वो रुक गई।

ताबीज़ चमका ही नहीं।

अयान दहला।
“ये… कैसे संभव है?”

परछाई ने ठंडी हँसी भरी।

> “मुझे ताबीज़ से डर नहीं लगता।
क्योंकि मैं… उसी की छाया हूँ
जिसको यह बचाता है।”



रूहानी पीछे हट गई।
“मत आओ… प्लीज़!”

परछाई ने हाथ बढ़ाया—
और उसके हाथ की उँगलियों में
काली धूल चमकने लगी।

“तुझे छू लूँगी…
तो तू वही बन जाएगी…
जो पहले जन्म में थी।”

अयान बीच में आकर खड़ा हो गया।

“पहले तुझे मुझसे गुजरना होगा।”

परछाई मुस्कुराई।

> “और यही तो ज़ारा चाहती है।”



अचानक हवा तेज़ हुई—
परछाई ने दोनों हाथ उठाए
और काला धुआँ अयान पर फेंक दिया।

अयान पीछे उछल गया,
दीवार से टकराकर गिर पड़ा।

रूहानी चीखकर उसकी ओर भागी।

अयान की साँसें टूटने लगीं।
सीना भारी।
होंठ सूखे हुए।

उसने मुश्किल से कहा—

“रू…हानी…
ये… वो हमला है…
जो इंसान झेल नहीं सकता…”

रूहानी की आँखों से आँसू बह निकले।

“नहीं…
अयान… उठो… प्लीज़ उठो…”

परछाई हँसी—

> “ये पहला बदला है।
अगला नंबर…
तुम्हारा है।”




---

⭐ 6. हवेली की दीवारों का रहस्य

तभी अचानक
हवेली की दीवारों पर
तेज़ नीली लकीरें उभर आईं।

दीवारें चमकने लगीं—
जैसे कोई पुराना ताबीज़ सक्रिय हुआ हो।

परछाई के चेहरे पर घबराहट आई।

“नहीं…
ये नहीं हो सकता…”

रूहानी ने आँसू पोंछे।
“क्या हुआ?”

परछाई बुदबुदाई—

“किसी ने…
इस हवेली में
पवित्र रूह को जगाया है…”

अयान ने मुश्किल से कहा—

“रू…हानी…
उसे महसूस करो…
वो… तुम्हें ही बुला रही है…”

हवेली की छत पर रोशनी इकट्ठी हुई—
और नीले रंग का एक साया उतरा।

वो… कोई साधारण रूह नहीं थी।
उसका चेहरा धुँधला,
आकृति चमकीली
और उसके आस-पास
नीले फूलों की खुशबू।

अयान ने धीरे से कहा—

“वो…
तुम्हारी रक्षक रूह है…”

रूहानी ने काँपकर फुसफुसाया—

“मतलब…
मेरी रूह… दो हिस्सों में है?”

अयान ने सिर हिलाया।

“हाँ।
एक— जो प्यार बनकर लौटी है।
दूसरी— जो बदला बनकर।”


---

⭐ 7. पहला टकराव – पवित्र रूह बनाम अंधेरी रूह

नीला साया
परछाई के सामने आ खड़ा हुआ।

परछाई चिल्लाई—

> “तू मुझे नहीं रोक सकती!
तू सिर्फ़ उसकी आधी रूह है!”



नीले साये की आवाज़ हवा में गूँजी—

> “आधी सही…
पर मैं पवित्र हूँ।
और पवित्रता…
अंधकार से हमेशा बड़ी होती है।”



दोनों के बीच बिजली सी चमकी।
हवा में भयंकर कंपन हुआ।
दीवारें काँप उठीं।
रोशनियाँ बुझ-बुझकर जलती रहीं।

रूहानी अयान को पकड़कर पीछे हट गई।

अयान ने टूटे स्वर में कहा—

“ये युद्ध…
तुम्हारी रूहों के बीच है।
और इसका फैसला…
तुम्हारा दिल करेगा।”

रूहानी की साँसें थम गईं।

“मेरा दिल…?”

अयान ने उसे सीने से लगाया।

“हाँ…
तुम किस रूह को अपनाओगी…
यही तय करेगा कि
ज़ारा जीतेगी…
या तुम।”

परछाई चीखी—

> “वो मेरी है!”



नीला साया बोला—

> “वो खुद का फैसला खुद करेगी।”



हवेली में तूफ़ान उठ चुका था।

और रूहानी—
उसके बीचों-बीच खड़ी थी।


---

🌙 एपिसोड 59 — हुक लाइन

> “दो रूहें एक शरीर के लिए लड़ रही थीं…
पर रूहानी का दिल सिर्फ़ एक नाम पुकार रहा था—
अयान।”