Deewane Ki Diwaniyat - Episode in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 13

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 13

बगावत के सुर, एपिसोड 13:

रहस्यमहीनों बाद स्टेशन पर बड़ा उद्घाटन—नई इलेक्ट्रिक ट्रेन। पृथ्वी स्पीच दे रहा, "बगावत के सुर अब शांति के।" सनाया स्टेज पर आरव को गोद में। ताली बजी। लेकिन रात को घर पर अजीब घटना। आरव अचानक चीखा, आँखें लाल। सनाया घबरा गई। डॉक्टर ने चेक किया—सब नॉर्मल। लेकिन रुद्र ने फुसफुसाया, "दीदी, भानु प्रताप के खून में श्राप था। काला जादू। क्या आरव में...?" विक्रम ने डाँटा, "बकवास!" पृथ्वी चुप। एक पुरानी डायरी मिली भानु की—'मेरा खून अमर। नई पीढ़ी में जागेगा।'अगली सुबह स्टेशन पर सायरन बजा। सिग्नल फिर फेल। स्क्रीन पर मैसेज: "आरव मेरा है। कालिया सिर्फ प्यादा था। असली मालिक जागा।" पृथ्वी का फोन बजा—एक बच्चे की हँसी। "पापा, मैं आ रहा हूँ।" सनाया रो पड़ी। नई छाया लंबी हो गई। क्या आरव में भानु का भूत? बगावत के सुर फिर

जागा श्राप, टूटे बंधनआरव की चीख ने घर हिला दिया। सनाया ने उसे सीने से लगाया, लेकिन बच्चे की आँखें फिर लाल चमकीं। पृथ्वी ने लाइट जलाई, "ये क्या?" रुद्र डायरी दिखाया, "पापा के खून में काला जादू। तांत्रिक ने श्राप दिया था—'तेरा वंशज मेरी शक्ति से बदला लेगा।'" विक्रम हँसा, "अंधविश्वास!" लेकिन स्टेशन का मैसेज सबके होश उड़ा दिया। कालिया जेल से बोला, "ये भानु का असली वारिस नहीं—श्राप। आरव में जागा।"श्राप की शुरुआतसुबह डॉक्टर आए। "आरव हेल्दी, लेकिन स्ट्रेस।" सनाया रोई, "मेरा बेटा... भूत?" पृथ्वी ने फैसला लिया, "पुराने तांत्रिक को ढूँढो। दर्पंगा के जंगल में बाबा रहते हैं।" रमेश ने ट्रेस किया—बाबा शंकर, भानु का पुराना दुश्मन। शाम को टीम जंगल। बाबा गुफा में। "श्राप सच्चा। भानु ने मेरी बेटी मारी। उसका खून तीन पीढ़ी तक बदला लेगा। आरव आखिरी। स्टेशन जलाकर खत्म करेगा।" रुद्र गिड़गिड़ाया, "बाबा, रास्ता बताओ।" बाबा बोला, "भानु की हड्डी जला दो। गंगा में विसर्जन। तब श्राप टूटेगा।"रात को स्टेशन पर हंगामा। आरव घर पर था, लेकिन प्लेटफॉर्म 1 पर आग लग गई। कोई नहीं दिखा, लेकिन कैमरे में एक छाया—छोटे कद की, भानु जैसी। यात्री भागे। पृथ्वी ने फायर ब्रिगेड बुलाई। जांच में पता चला—इलेक्ट्रिक सर्किट शॉर्ट, लेकिन अंदर से। विक्रम बोला, "श्राप? या कोई प्लानिंग?" सनाया फोन पर, "आरव बेचैन। आ जाओ!"परिवार का संकटघर पहुँचे। आरव बिस्तर पर लेटा, माथे पर पसीना। अचानक बोला—बच्चे की आवाज़ में नहीं, गहरी: "स्टेशन मेरा!" सब सन्न। सनाया चीखी। पृथ्वी ने गले लगाया। रुद्र ने बाबा का मंत्र पढ़ा। आरव शांत। लेकिन सुबह एक पत्र—जेल से कालिया: "श्राप को जगाया मैंने। भानु की हड्डी पुरानी कब्र में। लाओ, वरना आरव मर जाएगा।"पृथ्वी ने प्लान बनाया। रमेश के साथ भानु की पुरानी कब्र—दरभंगा के बाहर। रात को खुदाई। हड्डी मिली। लेकिन ट्रैप! कालिया के गुंडे घेरा। "हड्डी दो!" गोलीबारी। रमेश घायल। पृथ्वी ने भागते हुए हड्डी तोड़ी। विक्रम पहुँचा, गुंडों को भगाया। हड्डी के टुकड़े जला दिए। रुद्र बोला, "अब गंगा।"गंगा यात्रा और मोड़अगले दिन कन्वॉय। सनाया आरव को गोद में, सब गंगा घाट। आरव फिर चीखा। पानी में छाया दिखी—भानु का चेहरा। बाबा मंत्र पढ़े। हड्डी विसर्जित। अचानक तूफान। बिजली गिरी। सब भीग गए। आरव की आँखें सामान्य। सनाया मुस्कुराई, "खत्म?" लेकिन कालिया का फोन: "श्राप टूटा, लेकिन मेरा बदला बाकी। जेल से बाहर हूँ।"स्टेशन लौटे। उद्घाटन रद्द। पृथ्वी ने सिक्योरिटी बढ़ाई। रात को घर शांत। आरव सोया। सनाया पृथ्वी से लिपटी, "हम जीत गए?" चुंबन हुआ। लेकिन खिड़की पर छाया—एक नया चेहरा। कालिया का बेटा? विक्रम ने देखा। "नया खतरा।"महीने बाद स्टेशन पर शांति। आरव चलने लगा। फैमिली पिकनिक। रुद्र बोला, "भाई, मैं स्टेशन जॉइन करूँ?" पृथ्वी हँसा, "हाँ। नई शुरुआत।" लेकिन दूर से एक ट्रेन सीटी—धमकी भरी। पुरानी आग की चिंगारी फिर जली। क्या कालिया का बेटा अगला रुद्र? बगावत के सुर कभी मरते नहीं...एंड