Free Hindi Poem Quotes by श्रुत कीर्ति अग्रवाल | 111814111

समन्दर के पानी में तरंगें उठी थीं
आसमानों को छूने पतंगें चली थीं
मेरा नाम आया लबों पर तुम्हारे
तो दिल में हजारों उमंगे उठी थीं

लो चूड़ी खनक गई ये पायल की छन-छन
दिलकश बयारें सुवासित है कन-कन
खुल न जाए कहीं ये भेद दिलों का
होठों की बातों और आँखों की अनबन

मौलिक एवं स्वरचित

श्रुत कीर्ति अग्रवाल
shrutipatna6@gmail.com

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