Hindi Quote in Poem by kunal kps

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सांवली लड़कियाँ
धूप की उस नस्ल से आती हैं
जो खेतों में झुकी औरतों की पीठ पर
पसीने के संग आई थी।

शरमाने पे
उनके गाल गुलाबी नहीं होते,
ना वे काजल से आँखें धारदार बनाती हैं।
उनकी बोली में कोई राग नहीं,
एकदम से कच्चे आम की खटास होती है।

वे जल्दी लड़कों की “क्रश” नहीं बनतीं,
क्योंकि ये देश “रूप” को सिर्फ़ गोरेपन में मापता है।

और सांवली लड़कियाँ के शून्य दशमलव पाँच एनएम की त्वचा के भीतर,
फ़ेयर एंड लवली क्रीम दाखिल कहाँ हो पाती है।

लेकिन एक दिन
ये लड़कियाँ अपने पैरों से धूल झाड़ते हुए कहेंगी—
“हम गोरी क्यों हों?
हम तो धूप की बेटियाँ हैं।
हम तो लाल जलती हुई लकड़ी पे सिंकी रोटियाँ हैं।
हम अपने रंग में
अपने पुरखों की धूप , दुख, और आत्मा लिए जन्मी हैं!”

सांवली लड़कियाँ
नीम की छाँव जैसी होती हैं,
झीनी ,कड़वी, मगर ठंडी।
जिनकी छाया में
इंकलाब उगता हैं।.
.kps .......
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Hindi Poem by kunal kps : 111975858
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गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर
गांव की ज़िंदगी – सुकून का असली घर

सुबह की पहली किरण जैसे ही खेतों पर पड़ती, पूरा गांव सुनहरी रोशनी से जगमगा उठता। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, मंदिर की घंटियों की आवाज़ और ठंडी हवा मन को एक अलग ही शांति देती थी।

शहर में रहने वाली अनन्या कई साल बाद अपने दादा-दादी के गांव आई थी। शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और मोबाइल की दुनिया में वह खुद को थका हुआ महसूस करती थी। गांव पहुंचते ही उसने देखा—हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर घर का दरवाज़ा खुला था और हर इंसान एक-दूसरे का हाल पूछ रहा था।

एक सुबह दादाजी उसे खेतों में ले गए। हरी-भरी फसलें हवा के साथ झूम रही थीं। किसान मेहनत कर रहे थे, लेकिन उनके चेहरों पर संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

अनन्या ने पूछा, "दादाजी, यहां लोगों के पास शहर जैसी सुविधाएं तो नहीं हैं, फिर भी ये इतने खुश कैसे हैं?"

दादाजी मुस्कुराए और बोले, "बेटी, खुशी बड़ी-बड़ी इमारतों में नहीं, बल्कि संतोष, अपनापन और प्रकृति के साथ जीने में होती है।"

उस दिन अनन्या ने बच्चों के साथ मिट्टी में खेला, पेड़ों की छांव में बैठकर कहानियां सुनीं, तालाब किनारे सूर्यास्त देखा और रात को खुले आसमान में अनगिनत तारों को निहारा।

जब वापस शहर लौटने का समय आया, तो उसके दिल में एक नई सोच जन्म ले चुकी थी। उसने समझ लिया कि जीवन का असली सुख केवल पैसा कमाने में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों और प्रकृति के करीब रहने में है।

उसने तय किया कि चाहे वह शहर में रहे, लेकिन गांव की सादगी, प्रेम और शांति को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखेगी।

सीख:
"सच्ची खुशी वहीं मिलती है, जहां मन को शांति, रिश्तों में अपनापन और प्रकृति का साथ मिलता है। गांव की सादगी ही जीवन की सबसे बड़ी दौलत है।" 🌿🌾

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