हिसाब लगाओ
हिसाब लगाओ की आख़िर
तुमने यह ज़िंदगी में क्या पाया और क्या खोया?
हिसाब लगाओ की आख़िर
इस वक्त तक तुमने ज़िन्दगी को काटा या मोज़ से जिया ?
हिसाब लगाओ की आख़िर
कितना वक्त ज़ाया किया बेफ़ूज़ुल बहस में
और मुद्दे की चर्चा में?
हिसाब लगाओ की आख़िर
हमने लोगो के अभिप्राय से खुदको कितना
तोला और तराशा?
हिसाब लगाओ की आख़िर
ज़िंदगी में भागते दौड़ते ही रहे या
सुकून भी पाया?