फिर भी मैं बुरी हूं
हमसे पूछा सभी ने
हमने उन्हें दिया क्या
किसी ने पूछा ही नहीं की
हमें उनसे मिला क्या
हमेशा एक तरफा ही उम्मीद लगाई गई
और मैं उम्मीद लगाई तो वेमत हुई
वो उम्मीद जो सख्त पहेरो से लगे थे
उसमें बस एक तिनका ही हिला
और उन तीनके ने साबित कर दिया कि
मैं क्या हूं
उनके लिए जो मेरे अपने थे
सब मांगते गए
और मैं देता गया
मेरे हंसी मेरी खुशी मेरा
रोना मेरा कहना
मेरा बहन मेरी वक्त
मेरी जज्बात सबको दे दिया
उनकी जरूरत के हिसाब से
जब मुझे जरूर परी मेरी ही वक्त के तो
ताना मिला
मैंने वह क्यों नहीं की जो उसने कहा
शिकायत पर बहाना मिला
मैं खुद के लिए वक्त कैसे बचा ली
इस बात पर सख्त और जलील भरी लेहजे मिला
जब मैं पल भर सांस लेने की सूची
तो मैं बुरी हुई
अपने प्रिय जनों से मुझे यह नाम मिला
मैं ने किसी से उनके हिस्से की वक्त नहीं मांगा
मैं ने किसी से उनके हिस्से की हंसी नहीं मांगा
मैंने किसी से उनके हिस्से की कुछ भी
वेसकीमती की नहीं मांगा
मैं ने बस अपने हिस्से के जज्बात अपने पास रखना चाहा
फिर भी मैं बड़ी बुरी हूं
सबके हिस्से की मैंने दर्द लिया गम लिया
और मेरे हिस्से का दर्द और गम अपने दिल में दवा लिया
फिर भी मैं बुरी हूं
मैंने कहां कैसे की मुझे से नहीं होगा
जो मैं आज तक करता रहा
मैं एक बुरी बेटी हूं
सबने मुझे से सब ले लिया
और किसी ने कुछ दिया नहीं
फिर भी पूछा मैंने उनके लिए क्या किया
जहां मे एक लाइन सच है जो बड़ी फेमस है
चिड़कर सीना दिल निकाल कर भी रख दो
तुम अपनी प्रिय जनों के सामने
फिर भी कहेंगे यह कम ही है
सब कुछ लेने के बाद भी
मुझे अंदर से खोखला कर देने के बाद भी
कहते हैं तुमने मुझे दिया क्या
अगर आप सबको यह कविता अच्छी लगे तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपका प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯