इस वक्त के उल्लेख में
कविता
अगर अभी मौत की फरिश्ता आए तो
मैं डर के भागने की वजह
बिना डरे वही खड़ी रह जाऊंगी
अभी मौत से मुझे डर नहीं
और ना ही जिंदगी से कोई उम्मीद
हंसते मुस्कुराते हुए
चलते रहे सफर पर जिंदगी के गीत गुनगुनाते हुए
वह गीत जिसमें थोड़ी खुशी है थोड़ा गम
थोड़ी तन्हाई है थोड़ा प्यार
थोड़ा अकेलापन और अपनापन
उतार चढ़ाव से भरी जिंदगी
नहीं पता कैसी है
पर लोग कहते हैं
दिल में प्यार हो तो जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है
पर नहीं पता इस वक्त मेरे दिल में क्या है
बस लग रहा है कि
अगर यही जिंदगी है तो
मर जाना बुरा नहीं
खाना पीना और बेवजह के काम करना
और फिर थक कर सो जाना
यही जिंदगी है तो
मर जाना अच्छा है
मैं आज सोच रही थी
क्या मैं अभी इसी वक्त मर जाऊं तो
क्या मुझे तकलीफ होगी
शायद नहीं
मुझे बिल्कुल तकलीफ नहीं होगी
अपनी मौत पर
अगर मैं भी मर भी जाऊं तो
मुझे बिल्कुल पछतावा नहीं होगा
ना ही मैं डरूंगी मौत को अपने सामने देखकर
बेवजह की जीते रहने और सोते रहने से
अच्छा है मर जाना
इस वक्त मेरे दिल में जो भावनाएं बह रही है यही है
और इस वक्त की जिंदगी मेरी यही है
खुशी और गम महसूस नहीं हो रही
बस नींद आ रहा है
और ऐसा लग रहा है
कि सदियों तक सोई रहना चाहती हूं
और सदियों से सोती ही आई हूं
इसीलिए अभी मौत से भी मुझे डर नहीं
नहीं जिंदगी का अभिलाषा है
इस वक्त के उल्लेख में
मेरे पास जीने के लिए कोई खुशी नहीं है
नहीं प्यार करने के लिए कोई इंसान
नहीं तो कोई अपने हैं
जो कहे सके बस थोड़ी देर आराम कर लो
और फिर तुम कर सकती हो
जो तुम करना चाहती हो
इस वक्त बस तुम्हारी बॉडी की थोरी एनर्जी काम हो गई है
इस वक्त मेरे अंदर बस तन्हाई है
मैं ना हीं खुद में उलझा हूं ना ही कहीं और
बस यही जिंदगी है तो क्यों जिंदगी है
मेरी सवाल इस वक्त मुझे
और इस दुनिया से यही है