हाथों में मरहम और आँखों में प्यार हो,
हर दुखते दिल का वो सच्चा आधार हो।
थकान को पीछे छोड़ जो मुस्कुराए,
उसकी सेवा ही उसका सुंदर संसार हो।
पर सिर्फ त्याग ही उसकी कहानी न हो,
ज़िंदगी उसकी बस बहता पानी न हो।
मिले उसे भी अपनों का साथ और आराम,
सुकून से बीते उसकी भी हर शाम।
दूसरों को हँसाते हुए वो खुद को न खोए,
मरीज़ों के दर्द में वो अकेले न रोए।
मिले समाज में उसे वो पूरा सम्मान,
खिला रहे चेहरे पर हमेशा एक मीठी मुस्कान।
nandita bhupendra pandya