वक्त कहता है कि तू इंतजार कर
इन पत्तों की तरह गिर कर शाखाओं से
अपने आप को आजाद कर।
न देख कि ये जुदा हुए हैं अपने वजूद से,
तू देख गिरकर आए हैं ये अपने रूप में।
जब दर्द हो जो बिछड़ने से बढ़ जाए
तो पत्तों की खूबसूरती को अपना जो तुझको सिखाए,
कि दर्द के बाद ही मिलती है आजादी,
न देख या सोच इतना कि तू दर्द में हीं बस जाए।
तू रंग दे अपने आप को अपने आसमान से,
जैसे पत्ते गिरकर रंगते हैं हवाओ में बहकर आसमान को,
तू निकल घर से जैसे पत्ते उड़ते हैं नई ऊंचाइयों पर,
कदम बढ़ाएगा, तभी तो पहुंचेगा आसमान के क्षितिज पर।
- Fictional world